ऐसा
Автор: Ishq_banrasiya
Загружено: 2026-01-27
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हर हर महादेव दोस्तों मैं नितेश और स्वागत है आपका आपके चैनल ishq banrasiya par दोस्तों क्या आप जानते हैं कि बनारस की तंग गलियों के नीचे एक ऐसा कुंड छिपा है, जिसकी गहराई आज तक कोई नहीं नाप सका?"
"एक ऐसा स्थान जहाँ विज्ञान हार जाता है और चमत्कार शुरू होता है—
दोस्तों यह है काशी के सबसे रहस्यमयी 'लोलार्क कुंड' से।"
"क्या एक स्नान से सूनी गोद भर सकती है? जानिए लोलार्क कुंड के उस अटूट विश्वास की कहानी।"
"हजारों साल पुरानी परंपरा और लाखों लोगों की उम्मीद—आखिर क्यों 'लोलार्क कुंड में उमड़ता है जनसैलाब?"
क्या आपने कभी सुना है कि एक कुंड में नहाने के बाद लोग अपने कपड़े वहीं छोड़ देते हैं? और क्यों इसे 'लोलार्क' यानी 'कांपता हुआ सूरज' कहा जाता है? चलिए जानते हैं।"
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान सूर्य काशी की सुंदरता देख मोहित हुए, तो उनके रथ का एक पहिया यहाँ गिरा और यह कुंड बन गया।
लोलार्क का अर्थ लोल' मतलब चंचल या कांपता हुआ, 'अर्क' मतलब सूर्य। पानी में सूरज का प्रतिबिंब हिलता हुआ दिखता है।
ददोस्तों क्या आपको पता है माता कुंती ने यहाँ सूर्य की उपासना की थी)।
यह कुंड लगभग 50-60 फीट गहरा है।
इसकी बनावट एक विशाल 'बावड़ी' जैसी है।
नीचे उतरते समय तीन तरफ से ऊंची दीवारें और सीढ़ियाँ हैं।
दोस्तों, यहाँ तापमान अचानक 3-4 डिग्री गिर जाता है। इन पत्थरों को देखिए, ये सदियों पुराने हैं।"
पत्थरों पर जमी काई, दीवारों की नक्काशी देखकर लगता है ये बहुत ही प्राचीन कुंड है
हर साल भाद्रपद महीने की षष्ठी को यहाँ लाखों लोग आते हैं। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं और निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख मिलता है।"
स्नान के बाद लोग अपने गीले कपड़े वहीं छोड़ देते हैं और एक विशेष फल (जैसे करौंदा) का त्याग करते हैं।
लोलार्क कुंड में कपड़े छोड़ना और फल का त्याग करना केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं।
यहाँ इसका आसान भाषा में विस्तार है:
दोस्तों अब हम बात जड़केंगे यहा स्नान करने के बाद लोग अपने कलदे यहा क्यों छोड़ देते हैं
इसे "काया कल्प" या पुराने जीवन के त्याग के रूप में देखा जाता है:
जिसे नकारात्मकता का त्याग: माना जाता है कि इंसान की बीमारियाँ, दोष, और मानसिक परेशानियां (जैसे संतान न होने का दुख) उसके द्वारा पहने गए कपड़ों में समा जाती हैं। कुंड में स्नान करने के बाद, उन कपड़ों को वहीं छोड़ना इस बात का प्रतीक है कि आपने अपने जीवन के सारे दुखों और कष्टों को वहीं त्याग दिया है।
नया जन्म: स्नान के बाद नए कपड़े पहनना इस बात को दर्शाता है कि अब आप एक शुद्ध और नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।
अपने पहने हुए वस्त्रों को वहीं छोड़ देना यह भी दिखाता है कि आप ईश्वर के सामने पूरी तरह समर्पित हैं।
2. दोस्तों अब हम बात करेंगे यहा फल क्यों छोड़ते हैं?
संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने वाले दंपति किसी एक खास फल (जैसे- कद्दू, केला, या आम) का जीवन भर के लिए त्याग करने का संकल्प लेते हैं:
संकल्प की शक्ति (Commitment): अध्यात्म में किसी प्रिय चीज़ का त्याग करना "तपस्या" कहलाता है। जब आप अपनी पसंद की किसी चीज़ (फल) को छोड़ते हैं, तो वह आपको हर पल ईश्वर से मांगी गई अपनी मन्नत की याद दिलाता रहता है।
प्रकृति को धन्यवाद: यह माना जाता है कि फल जीवन का बीज है। एक फल का त्याग करके आप प्रकृति (Surya Dev) से प्रार्थना करते हैं कि वे आपके जीवन में "संतान" रूपी फल प्रदान करें।
संयम: यह एक तरह का मानसिक अनुशासन है जो इंसान को सिखाता है कि कुछ पाने के लिए कुछ छोड़ना पड़ता है।
अक्सर लोग "कदीमा" (कोहड़ा/कद्दू) छोड़ते हैं क्योंकि उसे "संतान" का प्रतीक माना जाता है। स्नान के बाद पति-पत्नी मिलकर एक फल को बीच से काटकर कुंड में प्रवाहित करते हैं और फिर उसी फल को जीवनभर नहीं खाने की शपथ लेते हैं।
एक रोचक बात: कई लोग तो इतने समर्पित होते हैं कि वे उस फल को घर में लाना या सूंघना भी बंद कर देते हैं ताकि उनका संकल्प कभी न टूटे।
लोलार्क कुंड में विशेष रूप से संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए की जाने वाली पूजा में कुछ खास सामग्रियों का उपयोग होता है। अगर आप वहाँ जा रहे हैं, तो इन चीजों को पहले से तैयार रखना अच्छा रहता है:
पूजा की मुख्य सामग्री (Santan Prapti Pooja Samagri)
फल (त्याग के लिए): कोई भी एक मौसमी फल (जैसे केला, सेब, या संतरा)। सबसे ज्यादा कदीमा (कद्दू) का महत्व है, क्योंकि इसे वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
नए वस्त्र: स्नान के बाद पहनने के लिए एक जोड़ी बिल्कुल नए कपड़े (सूती हो तो बेहतर)।
कलावा (मौली): पति-पत्नी के हाथों में बांधने और संकल्प लेने के लिए।
लाल फूल और सिंदूर: भगवान सूर्य और कुंड की पूजा के लिए।
दीपक और कपूर: आरती के लिए।
तांबे का लोटा: सूर्य देव को अर्घ्य (जल) देने के लिए।
अक्षत (चावल) और चंदन: तिलक लगाने के लिए।
पूजा की विधि (Short Process)
संकल्प: सबसे पहले पंडित जी की मदद से संकल्प लिया जाता है कि आप किस फल का त्याग कर रहे हैं।
एक साथ स्नान: पति-पत्नी एक साथ (अक्सर एक ही कपड़े या गमछे से बंधे हुए) कुंड में डुबकी लगाते हैं।
कपड़े छोड़ना: स्नान के तुरंत बाद पुराने कपड़े वहीं सीढ़ियों पर या निर्धारित स्थान पर छोड़ दिए जाते हैं।
फल दान/विसर्जन: जिस फल का त्याग किया है, उसे कुंड के जल में स्पर्श कराकर अर्पित किया जाता है।
सूर्य पूजन: बाहर आकर सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता है और संतान सुख की प्रार्थना की जाती है।
जरूरी सुझाव (Keep in Mind)
वहाँ कुंड के पास कई पंडित और दुकानें होती हैं जहाँ आपको "पूजा की थाली" तैयार मिलती है। लेकिन अपना नया कपड़ा और त्याग करने वाला फल आप खुद अपनी पसंद का ले जाएं तो बेहतर है।
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