सूरज उगेगा,कल फिर, तुम्हारे लिए , विश्वास पर दुनियां कायम है, योगेंद्र सहरावत
Автор: Hato Bacho
Загружено: 2026-01-17
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दर्द की भी एक हद हो सकती है, बस तुमको सहने की हद भूलनी पड़ेगी।
यक़ीनन ये सब जो भी हो रहा है उसका अपना वजूद है। ये हम सब नही रोक सकते, हमें सहज स्वीकार करना चाहिए। और आभार व्यक्त करना चाहिए।
योगेंद्र सहरावत,,,,,,,,
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