उरांव (Oraon) शादी और खास रस्म
Автор: PKB artworld
Загружено: 2026-01-09
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उरांव (Oraon) आदिवासी समुदाय की शादी बहुत ही अनोखी, रंगीन और परंपराओं से भरी होती है। उरांव जनजाति मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार में रहती है। इनकी शादी clan exogamy (अपने गोत्र से बाहर) और tribe endogamy (अपनी जनजाति के अंदर) के सिद्धांत पर आधारित होती है।अब तक की जानकारी के अनुसार उरांव शादी के मुख्य चरण और रस्में कुछ इस प्रकार होती हैं (ट्रेडिशनल सरना/सारना स्टाइल में, क्योंकि आजकल बहुत से लोग क्रिश्चियन भी हो गए हैं और चर्च में शादी करते हैं):मुख्य रस्में और प्रक्रियालगन/पहचान और बातचीत
लड़के-लड़की के परिवार पहले मिलते हैं। कई बार लगन पान नाम की रस्म होती है जिसमें दोनों परिवार मिलकर खाना-पीना, नाच-गाना और लोकगीत गाते हैं। ये एक तरह का औपचारिक मिलन होता है।
निमंत्रण
शादी से कुछ दिन पहले हल्दी और चावल (सूखा चावल + हल्दी) मिलाकर छोटे-छोटे पैकेट बनाए जाते हैं। औरतें अपने आँचल में रखकर रिश्तेदारों के घर जाकर निमंत्रण देती हैं। आमंत्रित व्यक्ति भी आँचल में ही ये ग्रहण करता है। ये बहुत खास और सुंदर परंपरा है।
पान बंधी / दहेज़ तय करना
पुराने समय में लड़के वाले लड़की के लिए bride price (पण) देते थे। आजकल ये कम हो गया है, लेकिन बातचीत ज़रूर होती है।
तेल-हल्दी / मैरिज तैयारी
दोनों पक्षों में लड़के-लड़की को बहनें तेल और हल्दी लगाती हैं (turmeric ceremony)।
बारात का स्वागत
बारात आने पर जनमासड्डा (खास जगह) पर बहनें-महिलाएँ कदसा नृत्य करती हैं। ढोल-नगाड़ा बजता है, बहुत जोशिली डांस होती है।
बारात का स्वागत पारंपरिक नृत्य और गीतों के साथ होता है।
मुख्य विवाह रस्म मंडप जैसी जगह बनाई जाती है (कभी-कभी पेड़ के नीचे या आंगन में)
हल जोतने का योक, घास का गट्ठर और चक्की का ढेर बनाया जाता है
दूल्हा-दुल्हन उस पर खड़े होते हैं
दूल्हा दुल्हन के एड़ी को अपने पैर से छूता है
कपड़े से दोनों को ढक दिया जाता है
पुजारी/बड़े बुजुर्ग मंत्र पढ़ते हैं और चुमावन (चावल चढ़ाना) होता है
ब्रास लोटे में आम की टहनी वाला पानी लाया जाता है
ढोल-नगाड़े पर सामान की घोषणा करते हुए गिफ्ट्स दिए जाते हैं
विवाह के बाद की खास रस्म
अगली सुबह एक बहुत अनोखी परंपरा होती है — दूल्हा दुल्हन के मांग में लगा सिंदूर पानी से धो देता है। ये झारखंड के उरांव समुदाय में बहुत प्रसिद्ध रस्म है।
आज के समय में बदलावबहुत से उरांव परिवार अब क्रिश्चियन हैं, इसलिए चर्च में शादी + रजिस्ट्रेशन होता है
कुछ परिवार हिंदू रीति से भी शादी करते हैं (पंडित बुलाकर)
लेकिन पारंपरिक सारना (प्रकृति पूजा) स्टाइल अभी भी गाँवों में खूब देखने को मिलती है
शादी में ढोल-नगाड़ा, करमा, झूमर, कोड़ा जैसे नाच बहुत जोर-शोर से होते हैं। खाना-पीना (हांड़िया खूब चलती है), और पूरा गाँव मिलकर जश्न मनाता है।
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