श्री हित चौरासी जी | 1 Hour Nonstop जोई-जोई प्यारौ करै सोई मोहि भावै | वृंदावन रस |
Автор: Naam Gaan
Загружено: 2026-02-05
Просмотров: 514
Описание:
राधे राधे 🙏
यह 1 घंटे का अविरल भक्ति–रस भजन
“श्री हित चौरासी जी” पर आधारित है —
जो श्री हित हरिवंश महाप्रभु की रसिक परंपरा से प्रकट
राधा–कृष्ण के माधुर्य प्रेम का दिव्य स्वरूप है।
इस भजन में वर्णित है —
✨ निकुंज लीला
✨ रास रस की अनुभूति
✨ राधारानी का अनंत सौंदर्य
✨ श्रीकृष्ण का मनोहर माधुर्य
✨ प्रेम-लक्षणा भक्ति का रहस्य
यह केवल एक भजन नहीं —
यह वृंदावन के आध्यात्मिक प्रेम लोक में प्रवेश का द्वार है।
🌸 यह भजन किनके लिए है?
✔️ राधारानी के अनन्य भक्त
✔️ श्रीकृष्ण प्रेमी
✔️ रसिक संतों की वाणी सुनने वाले
✔️ भक्ति मार्ग पर चलने वाले साधक
✔️ रात्रि जप / ध्यान करने वाले
यदि आप गहरे प्रेमभक्ति का अनुभव करना चाहते हैं,
तो यह भजन आपके हृदय को अवश्य स्पर्श करेगा।
🎧 How To Listen
हेडफोन लगाकर, आँखें बंद करें…
केवल “राधे राधे” का स्मरण करें…
और स्वयं को वृंदावन के निकुंज में अनुभव करें।
🙏 अगर यह भजन आपके हृदय को छू जाए —
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💬 Comment में लिखें: राधे राधे 🌸
।।1।। जोई-जोई प्यारौ करै सोई मोहि भावै, भावै मोहि जोई सोई-सोई करै प्यारे । मोकों तो भावती ठौर प्यारे के नैंनन में, प्यारौ भयौ चाहै मेरे नैंनन के तारे ।। मेरे तन मन प्राण हूँ ते प्रीतम प्रिय, अपने कोटिक प्राण प्रीतम मोंसों हारे । जय श्रीहित हरिवंश हंस-हंसिनी साँवल-गौर, कहौ कौन करै जल-तरंगनी न्यारे ।।1।। ।।2।। प्यारे बोली भामिनी आजु नीकी जामिनी, भेंट नवीन मेघ सों दामिनी । मोहन रसिक-राइरी माई, तासौं जु-मान करै, ऐसी कौन कामिनी । (जै श्री) हित हरिवंश श्रवण सुनत प्यारी, राधिका रवन सों मिली गज-गामिनी ।।2।। ।।3।। प्रात समय दोऊ रस लंपट, सूरत-जुद्ध जय-जुत अति फूल । श्रम वारिज घनविन्दु वदन पर, भूषण अंगहि अंग विकूल ।। कछु रह्यौ तिलक शिथिल अलकावलि, वदन कमल मानौं अलि भूल । (जै श्री) हित हरिवंश मदन-रंग रँगि रहे, नैंन बैंन कटि शिथिल दुकूल ।।3।। ।।4।। आजु तौ जुवति तेरौ, वदन आनन्द भरयौ, पिय के संगम के सूचत सुख चैंन । आलस-वलित बोल, सुरंग रँगे कपोल, विथकित अरुण उनींदे दोऊ नैंन ॥ रुचिर तिलक-लेश, किरत कुसुम-केश, सिर सीमंत भूषित मानौं तैं न । करुणाकर उदार, राखत कछु न सार, दसन-वसन लागत जब देंन ॥ काहे कौं दुरत भीरु, पलटे प्रीतम चीर, बस किये श्याम सिखै सत मैंन । गलित उरसि माल, सिथिल किंकिनी जाल, (जै श्री) हित हरिवंश लता-गृह सैंन।।4।। ।।5।। आजु प्रभात लता-मंदिर में, सुख बरसत अति हरषि युगल वर । गौर श्याम अभिराम रंगभरे, लटकि-लटकि पग धरत अवनि पर ॥ कुच-कुमकुम रंजित मालावलि, सुरत नाथ श्रीश्याम धाम घर । प्रिया प्रेम के अंक अलंकृत, चित्रित चतुर-शिरोमणि निजकर ॥ दम्पति अति अनुराग मुदित कल, गान करत मन हरत परस्पर । (जैश्री) हित हरिवंश प्रशंस-परायण, गायन अलि सुर देत मधुर तर ।।5।। ।।6।। ( राग विभास ) कौन चतुर जुवती प्रिया, जाहि मिलन लाल चोर है रैन । दुरवत क्यों अब दूरै सुनि प्यारे, रंग में गहले चैन में नैन ।। उर नख चंद विराने पट, अटपटे से बैन । (जै श्री) हित हरिवंश रसिक राधापति, प्रमथीत मैन ।।6।।
Naam Gaan presents soulful Hindi devotional music inspired by the rich spiritual heritage of India.
This channel features bhajans, naam jap, kirtans, and peaceful devotional songs for meditation, prayer, and inner peace.
🙏 Listen • Chant • Feel the Divine
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