94.गंधक शोधन [purification 0f sulphar] उपयोग का तरीका और फ़ायदे |
Автор: Ak Ayurveda
Загружено: 2018-12-06
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गंधक एक संस्कृत नाम है,सल्फर को ही संस्कृत और हिन्दी मे गंधक कहा जाता है। गंधक मे से सडे हुए अंडे के जैसी गंध आती है,इसलिए इसको गंधक कहा जाता है। यह चार रंग का होता है-लाल,पीला,सफ़ेदऔर काला। इसमे पीले रंग का गंधक आंतरिक उपयोग के लिए,सफ़ेद रंग का गंधक बाहरी उपयोग के लिए है। लाल और काला गंधक उपलब्ध नहीं है।
आयुर्वेद मे सल्फर को बहुत प्रकार के रोगो को ठीक करने मे प्रयोग किया जाता है,यह मूत्रवर्धक है,यह पित्त को बढ़ाता है और त्वचा रोग,गठियाऔर बढ़े हुए प्लीहा आदि मे उपयोगी है।
गंधक रसायन एक तरह का रसायन है,आयुर्वेद मे वे जड़ी बूटी या औषधि जो दीर्घायु और जीवन शक्ति को बढ़ावा देती है उन्हे रसायन कहा जाता है। यह त्वचा रोगो के लिए बहुत ही उपयोगी दवा है। सल्फर आंतरिक और वाह्य दोनों तरह से त्वचा संबंधी रोगो को ठीक करने के लिए प्रयोग किया जाता है। कम मात्रा मे आंतरिक प्रयोग से यह त्वचा (झिल्ली) पर कार्य करता है।यह दवा गंधक को हर्बल रूप देकर बनायी जाती है जिससे यह त्वचा मे आसानी से अवशोषित हो जाता है।
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