15 अगस्त 1964: जगत माता जी ने शरीर कैसे त्यागा? | क्यों मनाया जाता है मुक्ति पर्व? |
Автор: Thought Between the Lines
Загружено: 2025-10-14
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*कहानी का स्रोत:* यह कथा संत निरंकारी मिशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक जगत माता बुधवंती जी से प्रेरित है।
🔗 पुस्तक पढ़ें: https://www.nirankari.org/publication...
इस वीडियो में हम संत निरंकारी मिशन की ममतामयी जगत माता बुद्धवंती जी के जीवन के अंतिम क्षणों की हृदयस्पर्शी कहानी सुना रहे हैं। जानिए कैसे उन्होंने अपने आखिरी पलों में भी सेवा और कर्तव्य का पाठ पढ़ाया और कैसे उनके जाने से पूरा निरंकारी जगत शोक में डूब गया।
यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि त्याग, सेवा, और गुरुभक्ति की एक मिसाल है जिसे सुनकर आपकी आँखें नम हो जाएंगी। 15 अगस्त 1964 का वो दिन जब जगत माता जी ने नश्वर शरीर का त्याग किया और 'मुक्ति पर्व' की नींव रखी गई।
इस वीडियो में आप जानेंगे:
जगत माता जी के अंतिम दिन की पूरी घटना।
सेवादारों को उन्होंने आखिरी शिक्षा क्या दी?
शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी और बाबा गुरबचन सिंह जी ने क्या कहा?
15 अगस्त को 'मुक्ति पर्व' क्यों मनाया जाता है?
निरंकारी मिशन के उन समर्पित संतों की गाथा जिन्होंने अपना जीवन मानवता को समर्पित कर दिया।
यह वीडियो उन सभी महापुरुषों को एक श्रद्धांजलि है जिन्होंने हमें सेवा और सिमरन का मार्ग दिखाया।
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Disclaimer:
यह वीडियो संत निरंकारी मिशन की शिक्षाओं और इतिहास पर आधारित है। इसका उद्देश्य जगत माता बुद्धवंती जी और अन्य महापुरुषों के प्रेरणादायक जीवन को साझा करना है।
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