सरस्वती अमृतवाणी (Saraswati Amritwani) | COPYRIGHT FREE |
Автор: Sanatani bhajan
Загружено: 2026-01-22
Просмотров: 37
Описание:
#bhaktisong #bhaktibhajan #bhaktisager #bhakti2026 #trandingbhaktisong
#newbhaktisong2026
#viralbhaktisong
याह माॅं सरस्वती की अमृतवाणी है इसे आप सुबह का समय 11 बार जरूर सुने इसे आपका बुद्धि विवेक में फर्क पड़ेगा|
हां अमृतवाणी कॉपीराइट फ्री है इसको आप लोग अपने यूट्यूब चैनल में डाल सकते हैं मगर इसमें एक शुरुआत है वाह शुरू करने के लिए बुरा ही इसे डाउनलोड करके आप लोग अपने यूट्यूब चैनल में डाले अन्यथा कॉपीराइट लग सकती है |
(1)...LIKE
(2)... COMMENT
(3)... SHARE
(4)... SUBSCRIBE
यह सारा चीज करने के बाद आप लोग इस गाने को डाउनलोड करें अपने यूट्यूब चैनल में डाल सकते हैं इसमें कॉपीराइट नहीं मिलेगा 100% गारंटी है |
• सरस्वती माता की आरती | पवन सिंह | AI SONG ...
• जय शिवशंकर, जय गंगाधर || AI SONG | COPYRIG...
• जय शिव ओंकारा | शिव जी की आरती | Aarti of ...
• हनुमान चालीसा | AI SONG | note for copyrig...
सरस्वती अमृतवाणी (Saraswati Amritwani)
सुरमय वीणा धारिणी,
सरस्वती कला निधान,
पावन आशीष से करदे,
जन जन का कल्याण ।
विद्या बोध स्वरूपिणी,
मन मोहक तेरा रूप,
हर ले निशा अज्ञान की,
ज्ञान की देकर दूप ।
शारदे माँ सुरेस्वारी,
कर दुखों का अंत,
ज्योतिर्मय है जगत में,
महिमा तेरी अंनत ।
त्रिभुवन में है गूंजता,
मधुर तेरा संगीत,
दिव्य आकर्षण है लेता,
शत्रु का मन जीत ।
जय सरस्वती माँ,
जय हो सरस्वती माँ..
देवी ज्ञान विज्ञान की,
कष्ट हरण तेरा जाप,
तेरे उपासक को छुवे,
कभी न दुःख संताप ।
कला निधि करुनेस्वरी,
करुणा करदे आपार,
कलह कलेश न हो यहाँ,
सुखमय हो संसार ।
सात सुरों के स्वामिनी,
सातों रंग तेरे पास,
अपने साधक की करना,
पूर्ण हर एक आश ।
श्री नारायण की प्रिय,
प्रीत की पुस्तक खोल,
पीड़ित पा जाए शांति,
वाणी मनोहर बोल ।
जय सरस्वती माँ,
जय हो सरस्वती माँ..
बुद्धि और विवेक का,
दे सबको उपहार,
सर्व कलाओं से मैया,
भरे तेरे भण्डार ।
परम योग स्वरूपिणी,
मोडक मन की हर,
सर्व गुणों के रत्नों से,
घर साधक का भर ।
कला में दे प्रवीणता,
जग में बढ़ा सम्मान,
तेरे अनुग्रह से बनते,
अनपढ़ भी विद्वान ।
भगतों के मन पटल पर,
अंकित हो तेरा नाम,
हर एक कार्य का मिले,
मन बांछित परिणाम ।
जय सरस्वती माँ,
जय हो सरस्वती माँ..
तेरी अनुकम्पा से होता,
प्रतिभा का विकाश,
ख्याति होती विश्व में,
जीवन आता रास ।
हंस के वाहन बैठ के,
प्रिये जगत में घूम,
दशों दिशाओं में मची,
तेरे नाम की धूम ।
स्मरण शक्ति दे हमें,
जग की श्रृजन हार,
तेरे कोष में क्या कमी,
तूम हो अपरंपार ।
श्वेत कमल के आसन पर,
मैया रही विराज,
तेरी साधना जो करे,
सिद्ध करे उनके काज ।
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: