Suvarnamala Stuti by Adi Shankaracharyaया हिंदी में: शिव सुवर्णमाला स्तुति - आदि शंकराचार्य कृत
Загружено: 2026-03-16
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रचना शैली — प्रत्येक श्लोक की पहली पंक्ति शिव के विभिन्न नामों, गुणों, लीलाओं और रूपों का वर्णन करती है (जैसे त्रिनेत्र, चंद्रशेखर, उमा के साथ, कामदहन आदि)। दूसरी पंक्ति हर श्लोक में समान रहती है:
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्
(अर्थ: हे साम्ब (उमा के साथ), सदाशिव, शम्भो, शंकर! आपके चरण युगल ही मेरी शरण हैं।)
भक्ति का सार — यह स्तुति पूर्ण समर्पण (शरणागति), शिव की महिमा का गुणगान और आत्म-शुद्धि पर केंद्रित है। आदि शंकराचार्य इसमें अद्वैत वेदांत के तत्व भी घोलते हैं, जैसे ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या का संकेत (श्लोक 13, 42 आदि में)। नियमित पाठ से मन की शुद्धि, पाप नाश, भक्ति वृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महत्व — यह शिव भक्तों के बीच बहुत प्रिय है, खासकर महाशिवरात्रि, सोमवार या शिव पूजा में। इसे "वर्णमाला की सुनहरी माला" कहते हैं, जो भाषा की सुंदरता और शिव भक्ति को एक साथ जोड़ती है। कई संगीतकारों ने इसे गाया है (जैसे कुलदीप एम पाई, राहुल वेल्लाल आदि), और यह यूट्यूब पर लाखों बार सुना जाता है।
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