भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) , रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया, भारत का केंद्रीय बैंक
Автор: शिक्षा का सफर CHANNEL ( MONU ALL INDIA CHANNEL )
Загружено: 2025-12-29
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इसके बारे में कई रोचक और अनोखी बातें हैं जो आमतौर पर लोग नहीं जानते।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भारत की मौद्रिक व्यवस्था की रीढ़ है।
इसकी स्थापना 1935 में हुई थी और यह मुद्रा छापने, बैंकिंग प्रणाली नियंत्रित करने,
और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का काम करता है।
आरबीआई भारत का केंद्रीय बैंक है जो देश की मौद्रिक नीति,
मुद्रा जारी करना और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करता है।
यह 1935 में स्थापित हुआ और 1949 में राष्ट्रीयकृत किया गया |
RBI का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह भारत की अर्थव्यवस्था का “मस्तिष्क” है |
यह मुद्रा, बैंकिंग और वित्तीय स्थिरता को नियंत्रित
करके देश की आर्थिक नींव को मज़बूत रखता है।
आरबीआई एक विधिक संस्था (statutory body) है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम,
1934 द्वारा संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत स्थापित की गई है। यह संवैधानिक संस्था नहीं है,
क्योंकि संविधान में इसका सीधा उल्लेख या प्रावधान नहीं है; बल्कि यह संसदीय विधान द्वारा निर्मित है।
स्वायत्तता
धारा 7(1) के तहत सरकार जनहित में निर्देश दे सकती है,
लेकिन सामान्यतः यह स्वायत्त कार्य करता है।
यह मौद्रिक नीति, मुद्रा जारी करना और बैंकिंग विनियमन जैसे कार्य करता है
अंतर
संवैधानिक: संविधान द्वारा सीधे स्थापित (जैसे चुनाव आयोग)।
विधिक: संसदीय अधिनियम द्वारा (जैसे RBI, SEBI)।
संरचना
आरबीआई अधिनियम की धारा 3 के तहत यह एक निगमित निकाय (corporate body) है,
जिसकी पूंजी 5 करोड़ रुपये है और इसका केंद्रीय बोर्ड कार्य संभालता है।
गवर्नर और डिप्टी गवर्नर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं।
इतिहास
आरबीआई की स्थापना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम 1934 के तहत हुई।
पहला गवर्नर सर ऑस्बर्न स्मिथ थे, जबकि पहले भारतीय गवर्नर सी.डी. देशमुख बने |
1949 में इसे पूर्ण रूप से सरकारी स्वामित्व में ले लिया गया |
🏦 RBI का इतिहास और स्थापना
स्थापना: 1 अप्रैल 1935 को, हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर।
राष्ट्रीयकरण: 1949 में RBI को राष्ट्रीयकृत किया गया।
मुख्यालय: प्रारंभ में कोलकाता में था, बाद में 1937 में मुंबई स्थानांतरित हुआ।
कानूनी आधार: RBI Act, 1934 के तहत कार्य करता है।
आरबीआई का न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (MRS) मुद्रा जारी करने का आधार है,
जिसमें बैंक को हमेशा कम से कम 200 करोड़ रुपये के मूल्य की संपत्ति रखनी होती है।
इसमें 115 करोड़ स्वर्ण सिक्कों या बुलियन के रूप में और शेष 85 करोड़ विदेशी मुद्रा में होते हैं |
कार्यप्रणाली
आरबीआई इस न्यूनतम आरक्षित बनाए रखने के बाद अर्थव्यवस्था की मांग
के अनुसार अतिरिक्त नोट छाप सकता है,बिना किसी निश्चित अनुपात के।
यह 1956 में प्रारंभ हुई प्रणाली लचीली है, जो मुद्रा आपूर्ति बढ़ाने में सहायक है |
उद्देश्य
MRS मुद्रा धारकों में विश्वास जगाता है कि नोटों का मूल्य सुरक्षित है, क्योंकि RBI गवर्नर
"मैं धारक को इतने रुपये का भुगतान करने का वचन देता हूं" कहते हैं।
यह मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक लेन-देन की जरूरत पूरी करता है
लाभ-हानि
लचीलापन: संकटकाल में मुद्रा बढ़ोतरी संभव।
जोखिम: अत्यधिक छपाई से महंगाई बढ़ सकती है।
🌟 RBI की मुख्य भूमिकाएँ
RBI का लोगो: इसमें एक बाघ और ताड़ का पेड़ है,
जो शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है।
मनी म्यूज़ियम: मुंबई में RBI का एक अनोखा संग्रहालय है
जहाँ प्राचीन सिक्के और नोट प्रदर्शित हैं।
शैक्षिक केंद्र: चेन्नई में RBI का विशेष शैक्षिक हब है।
मास्कॉट: RBI का एक मज़ेदार मास्कॉट है – Money Kumar |
90वीं वर्षगांठ: 2024 में RBI ने अपनी 90वीं वर्षगांठ
पर ₹90 का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया।
पहला गवर्नर: सर ऑस्बॉर्न स्मिथ (ब्रिटिश) पहले गवर्नर थे;
पहले भारतीय गवर्नर सी.डी. देशमुख बने।
कर्मचारियों की संख्या: RBI में लगभग 11,000 कर्मचारी कार्यरत हैं |
नियुक्ति केंद्रीय बोर्ड
गवर्नर का कार्यकाल सामान्यतः 3 वर्ष का होता है, जिसे बढ़ाया जा सकता है।
वर्तमान गवर्नर संजय मल्होत्रा हैं। डिप्टी गवर्नर भी केंद्र सरकार नियुक्त करती है
आरबीआई में एक ही समय में केवल एक गवर्नर होता है,
जिसकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम,
1934 की धारा 8(1)(a) के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता
है के तहत 3 वर्ष के लिए की जाती है।
इसके अलावा अधिकतम 4 डिप्टी गवर्नर नियुक्त हो सकते हैं,
जो गवर्नर की सहायता करते हैं।
सीमा
कानूनन एक गवर्नर ही संभव है; एकाधिक गवर्नर की कोई व्यवस्था नहीं।
डिप्टी गवर्नर 4 तक हो सकते हैं, जो विभिन्न विभाग संभालते हैं।
आरबीआई में अधिकतम एक गवर्नर हो सकता है,
जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 8(1)
नियुक्ति प्रक्रिया
गवर्नर का चयन वित्त मंत्रालय की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है,
और पद की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
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