“चित्त स्थिर कैसे होता है? | अभ्यास–वैराग्य रहस्य | समाधि पाद , सूत्र 12–22
Автор: Sudhi Gyan Sadhana
Загружено: 2026-01-29
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इस वीडियो में हमने पतंजलि योगदर्शन के समाधि पाद के
सूत्र 12 से 22 का क्रमबद्ध, गहन एवं व्यावहारिक अध्ययन किया है।
इन सूत्रों में महर्षि पतंजलि बताते हैं कि
👉 चित्तवृत्तियों का निरोध कैसे होता है
👉 अभ्यास और वैराग्य का वास्तविक अर्थ क्या है
👉 समाधि की विभिन्न अवस्थाएँ कौन-सी हैं
👉 साधक के पुरुषार्थ की तीव्रता का क्या महत्व है
📘 इस वीडियो में प्रमुख विषय:
अभ्यास और वैराग्य द्वारा वृत्तिनिरोध (सूत्र 12)
अभ्यास की परिभाषा और उसकी दृढ़ता (सूत्र 13–14)
वैराग्य के स्तर और परवैराग्य (सूत्र 15–16)
सम्प्रज्ञात समाधि की अवस्थाएँ (सूत्र 17)
असम्प्रज्ञात समाधि का स्वरूप (सूत्र 18)
विदेह और प्रकृतिलय योगी (सूत्र 19)
श्रद्धा, वीर्य, स्मृति और प्रज्ञा की भूमिका (सूत्र 20)
तीव्र पुरुषार्थ से शीघ्र समाधि (सूत्र 21–22)
योगसूत्र के ये सूत्र साधक को यह सिखाते हैं कि—
🪔 योग कोई आकस्मिक अनुभव नहीं, बल्कि निरन्तर साधना का परिणाम है।
🪔 श्रद्धा, समर्पण और तीव्र संकल्प से ही समाधि सुलभ होती है।
यह वीडियो उन सभी के लिए उपयोगी है—
✔ जो योग को केवल आसन नहीं, जीवन-दर्शन मानते हैं
✔ जो ध्यान और साधना में गहराई चाहते हैं
✔ जो पतंजलि योगसूत्र का शास्त्रीय अध्ययन करना चाहते हैं
🙏
श्रद्धा, धैर्य और निरन्तर अभ्यास के साथ
समाधि पाद की इस यात्रा में हमारे साथ आगे बढ़िए।
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