ज्ञान के साबुन से कपड़ा हो । Gyaan Ke Sabun se Kapda Ho । भजन । भगत चंद्र दास। कोमल प्रसाद जी।
Автор: Bhakti aoudhi nirgun bhajan
Загружено: 2026-02-09
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"ज्ञान के साबुन से मन का कपड़ा धो" एक बहुत ही गहरा और आध्यात्मिक निर्गुण भजन है। यह हमें सिखाता है कि जिस तरह हम शरीर और कपड़ों की सफाई करते हैं, वैसे ही ज्ञान के माध्यम से अपने मन के विकारों को दूर करना चाहिए।
शीर्षक: ज्ञान के साबुन से कपड़ा हो ।
भजन: ज्ञान के साबुन से कपड़ा हो।
विषय: आध्यात्मिक / आत्म-चिंतन / निर्गुण भजन
गायक : भगत चंद्र दास, कोमल प्रसाद जी।
ढोलक मास्टर- शिव मूरत जी
संपर्क सूत्र- 9161578819
नमो नारायण! 🙏
आज का यह भजन जीवन की सच्चाई को दर्शाता है। संत कबीर और महापुरुषों की वाणी हमें याद दिलाती है कि बाहरी दिखावे से ज्यादा जरूरी मन की शुद्धि है। "ज्ञान के साबुन" और "भक्ति के जल" से अपने अंतर्मन को निर्मल करने का संदेश देता यह भजन आपको शांति और प्रेरणा प्रदान करेगा।
अगर आपको यह आध्यात्मिक प्रस्तुति पसंद आए, तो इसे अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा करें।
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