Yugalvar Thadho Kunj Latan | Kripaluji Maharaj Bhajan | Prem Ras Madira-Yugal Madhuri
Автор: Radha Krishna Mandir Cuttack
Загружено: 2021-08-03
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Written and Composed by Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj
Prem Ras Madira-Yugal Madhuri
युगलवर, ठाढ़ो कुंज लतान ।
नथवारी वृषभानुदुलारी, मुरली वारो कान्ह ।
लखतहिं बनत जुगल जोड़ी की, मधुर मधुर मुसकान ।
गलबाहीं दीने रंग भीने, नैनन कीने बान।
करति निछावर प्रान सखिन लखि, प्रेम-रूप-रस-खान ।
मनमोहन 'कृपालु' मनमोहिनि, टेरत मुरली तान ॥
भावार्थ-युगल सरकार श्यामा श्याम लताओं के कुञ्ज में खड़े हैं । वृषभानुनन्दिनी की नथ की शोभा एवं श्यामसुन्दर की मुरली की शोभा सर्वाधिक आकर्षक है । श्यामा श्याम की मन्द मन्द मुसकान तो बस देखते ही बनती है। दोनों ही प्रेम रंग में सराबोर गलवाहीं दिये हुए, एक दूसरे पर प्रेम रस भरे कटाक्षपात् करते हैं । प्रेम, रूप, एवं रस के भण्डार इन युगल सरकार को देख कर सखियाँ अपना सर्वस्व न्योछावर करती हैं । "कृपालु" कहते हैं कि मनमोहन श्यामसुन्दर मनमोहिनी मुरली की तान भी छेड़ रहे हैं।
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