ycliper

Популярное

Музыка Кино и Анимация Автомобили Животные Спорт Путешествия Игры Юмор

Интересные видео

2025 Сериалы Трейлеры Новости Как сделать Видеоуроки Diy своими руками

Топ запросов

смотреть а4 schoolboy runaway турецкий сериал смотреть мультфильмы эдисон
Скачать

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:५८-६८)

Автор: RamcharitManas-Kashi

Загружено: 2025-04-11

Просмотров: 22418

Описание: रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड प्लेलिस्ट

   • रामचरितमानस मूलपाठ:उत्तरकाण्ड  

दो. -भव बंधन ते छूटहिं नर जपि जा कर नाम।
खर्च निसाचर बाँधेउ नागपास सोइ राम ॥ ५८ ॥

नाना भाँति मनहि समुझावा। प्रगट न ग्यान हृदयँ भ्रम छावा ॥
खेद खिन्न मन तर्क बढ़ाई। भयउ मोहबस तुम्हरिहिं नाई ॥
ब्याकुल गयउ देवरिषि पाहीं। कहेसि जो संसय निज मन माहीं ॥
सुनि नारदहि लागि अति दाया। सुनु खग प्रबल राम कै माया ॥
जो ग्यानिन्ह कर चित अपहरई। बरिआई बिमोह मन करई ॥
जेहिं बहु बार नचावा मोही। सोइ ब्यापी बिहंगपति तोही ॥
महामोह उपजा उर तोरें। मिटिहि न बेगि कहें खग मोरें ॥
चतुरानन पहिं जाहु खगेसा। सोइ करेहु जेहि होइ निदेसा ॥

दो. अस कहि चले देवरिषि करत राम गुन गान।
हरि माया बल बरनत पुनि पुनि परम सुजान ॥ ५९ ॥

तब खगपति बिरंचि पहिं गयऊ। निज संदेह सुनावत भयऊ ॥
सुनि बिरंचि रामहि सिरु नावा। समुझि प्रताप प्रेम अति छावा ॥
मन महुँ करइ बिचार बिधाता। माया बस कबि कोबिद ग्याता ॥
हरि माया कर अमिति प्रभावा। बिपुल बार जेहिं मोहि नचावा ॥
अग जगमय जग मम उपराजा। नहिं आचरज मोह खगराजा ॥
तब बोले बिधि गिरा सुहाई। जान महेस राम प्रभुताई ॥
बैनतेय संकर पहिं जाहू। तात अनत पूछहु जनि काहू ॥
तहँ होइहि तव संसय हानी। चलेउ बिहंग सुनत बिधि बानी ॥

दो. परमातुर बिहंगपति आयउ तब मो पास।
जात रहेउँ कुबेर गृह रहिहु उमा कैलास ॥ ६० ॥

तेहिं मम पद सादर सिरु नावा। पुनि आपन संदेह सुनावा ॥
सुनि ता करि बिनती मृदु बानी। परेम सहित मैं कहेउँ भवानी ॥
मिलेहु गरुड़ मारग महँ मोही। कवन भाँति समुझावौं तोही ॥
तबहि होइ सब संसय भंगा। जब बहु काल करिअ सतसंगा ॥
सुनिअ तहाँ हरि कथा सुहाई। नाना भाँति मुनिन्ह जो गाई ॥
जेहि महुँ आदि मध्य अवसाना। प्रभु प्रतिपाद्य राम भगवाना ॥
नित हरि कथा होत जहँ भाई। पठवउँ तहाँ सुनहि तुम्ह जाई ॥
जाइहि सुनत सकल संदेहा। राम चरन होइहि अति नेहा ॥

दो. बिनु सतसंग न हरि कथा तेहि बिनु मोह न भाग।
मोह गएँ बिनु राम पद होइ न दृढ़ अनुराग ॥ ६१ ॥

मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा। किएँ जोग तप ग्यान बिरागा ॥
उत्तर दिसि सुंदर गिरि नीला। तहँ रह काकभुसुंडि सुसीला ॥
राम भगति पथ परम प्रबीना। ग्यानी गुन गृह बहु कालीना ॥
राम कथा सो कहइ निरंतर। सादर सुनहिं बिबिध बिहंगबर ॥
जाइ सुनहु तहँ हरि गुन भूरी। होइहि मोह जनित दुख दूरी ॥
मैं जब तेहि सब कहा बुझाई। चलेउ हरषि मम पद सिरु नाई ॥
ताते उमा न मैं समुझावा। रघुपति कृपाँ मरमु मैं पावा ॥
होइहि कीन्ह कबहुँ अभिमाना। सो खौवै चह कृपानिधाना ॥
कछु तेहि ते पुनि मैं नहिं राखा। समुझइ खग खगही कै भाषा ॥
प्रभु माया बलवंत भवानी। जाहि न मोह कवन अस ग्यानी ॥

दो. ग्यानि भगत सिरोमनि त्रिभुवनपति कर जान।
ताहि मोह माया नर पावँर करहिं गुमान ॥ ६२(क) ॥

मासपारायण, अट्ठाईसवाँ विश्राम
सिव बिरंचि कहुँ मोहइ को है बपुरा आन।
अस जियँ जानि भजहिं मुनि माया पति भगवान ॥ ६२(ख) ॥

गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा। मति अकुंठ हरि भगति अखंडा ॥
देखि सैल प्रसन्न मन भयऊ। माया मोह सोच सब गयऊ ॥
करि तड़ाग मज्जन जलपाना। बट तर गयउ हृदयँ हरषाना ॥
बृद्ध बृद्ध बिहंग तहँ आए। सुनै राम के चरित सुहाए ॥
कथा अरंभ करै सोइ चाहा। तेही समय गयउ खगनाहा ॥
आवत देखि सकल खगराजा। हरषेउ बायस सहित समाजा ॥
अति आदर खगपति कर कीन्हा। स्वागत पूछि सुआसन दीन्हा ॥
करि पूजा समेत अनुरागा। मधुर बचन तब बोलेउ कागा ॥

दो. नाथ कृतारथ भयउँ मैं तव दरसन खगराज।
आयसु देहु सो करौं अब प्रभु आयहु केहि काज ॥ ६३(क) ॥

सदा कृतारथ रूप तुम्ह कह मृदु बचन खगेस।
जेहि कै अस्तुति सादर निज मुख कीन्हि महेस ॥ ६३(ख) ॥

सुनहु तात जेहि कारन आयउँ। सो सब भयउ दरस तव पायउँ ॥
देखि परम पावन तव आश्रम। गयउ मोह संसय नाना भ्रम ॥
अब श्रीराम कथा अति पावनि। सदा सुखद दुख पुंज नसावनि ॥
सादर तात सुनावहु मोही। बार बार बिनवउँ प्रभु तोही ॥
सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता। सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता ॥
भयउ तासु मन परम उछाहा। लाग कहै रघुपति गुन गाहा ॥
प्रथमहिं अति अनुराग भवानी। रामचरित सर कहेसि बखानी ॥
पुनि नारद कर मोह अपारा। कहेसि बहुरि रावन अवतारा ॥
प्रभु अवतार कथा पुनि गाई। तब सिसु चरित कहेसि मन लाई ॥

दो. बालचरित कहिं बिबिध बिधि मन महँ परम उछाह।
रिषि आगवन कहेसि पुनि श्री रघुबीर बिबाह ॥ ६४ ॥

बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा। पुनि नृप बचन राज रस भंगा ॥
पुरबासिंह कर बिरह बिषादा। कहेसि राम लछिमन संबादा ॥
बिपिन गवन केवट अनुरागा। सुरसरि उतरि निवास प्रयागा ॥
बालमीक प्रभु मिलन बखाना। चित्रकूट जिमि बसे भगवाना ॥
सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना ॥
करि नृप क्रिया संग पुरबासी। भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी ॥
पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए। लै पादुका अवधपुर आए ॥
भरत रहनि सुरपति सुत करनी। प्रभु अरु अत्रि भेंट पुनि बरनी ॥

दो. कहि बिराध बध जेहि बिधि देह तजी सरभंग ॥
बरनि सुतीछन प्रीति पुनि प्रभु अगस्ति सतसंग ॥ ६५ ॥

कहि दंडक बन पावनताई। गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई ॥
पुनि प्रभु पंचवटीं कृत बासा। भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासा ॥
पुनि लछिमन उपदेस अनूपा। सूपनखा जिमि कीन्हि कुरूपा ॥
खर दूषन बध बहुरि बखाना। जिमि सब मरमु दसानन जाना ॥
दसकंधर मारीच बतकहीं। जेहि बिधि भई सो सब तेहिं कही ॥
पुनि माया सीता कर हरना। श्रीरघुबीर बिरह कछु बरना ॥
पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही। बधि कबंध सबरिहि गति दीन्ही ॥
बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा। जेहि बिधि गए सरोबर तीरा ॥

https://sanskritdocuments.org/doc_z_otherl...

Не удается загрузить Youtube-плеер. Проверьте блокировку Youtube в вашей сети.
Повторяем попытку...
रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:५८-६८)

Поделиться в:

Доступные форматы для скачивания:

Скачать видео

  • Информация по загрузке:

Скачать аудио

Похожие видео

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:६८-७७)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:६८-७७)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१०२-१०८)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१०२-१०८)

मनु-शतरुपा का भगवान की पुत्ररुप से प्राप्ति के लिये तप एवं वरदान #मानसगान #RamcharitManas

मनु-शतरुपा का भगवान की पुत्ररुप से प्राप्ति के लिये तप एवं वरदान #मानसगान #RamcharitManas

Ramdhun - Raga shivranjani - Jignesh Tilavat

Ramdhun - Raga shivranjani - Jignesh Tilavat

ЗАБУДЬТЕ о соломе и опилках! Эти 2 растения заменят мульчу навсегда

ЗАБУДЬТЕ о соломе и опилках! Эти 2 растения заменят мульчу навсегда

АМЕРИКАНЦЫ СПИСАЛИ СВОЙ САМОЛЕТ В СССР, НО ТО СОВЕТСКИЕ ЛЕТЧИКИ ИЗМЕНИЛИ В НЕМ ПЕРЕВЕРНУЛО ХОД ВОЙНЫ

АМЕРИКАНЦЫ СПИСАЛИ СВОЙ САМОЛЕТ В СССР, НО ТО СОВЕТСКИЕ ЛЕТЧИКИ ИЗМЕНИЛИ В НЕМ ПЕРЕВЕРНУЛО ХОД ВОЙНЫ

⚡️ПУТИН И НАБИУЛЛИНА УЧИЛИСЬ

⚡️ПУТИН И НАБИУЛЛИНА УЧИЛИСЬ "ДЕМОКРАТИИ" В США? ВЫСТУПЛЕНИЯ ОБ ОБРАЗОВАНИИ И ПРЕСТУПНОСТИ

ГРИБОЕДОВ - автор ГОРЕ ОТ УМА, которого РАСТЕРЗАЛА ТОЛПА: правда, скрытая в УЧЕБНИКАХ!

ГРИБОЕДОВ - автор ГОРЕ ОТ УМА, которого РАСТЕРЗАЛА ТОЛПА: правда, скрытая в УЧЕБНИКАХ!

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ सरल समझ आये | फिल्म की तरह सारे सीन है ऐसा नहीं देखा होगा | चंद्रभूषण पाठक

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ सरल समझ आये | फिल्म की तरह सारे सीन है ऐसा नहीं देखा होगा | चंद्रभूषण पाठक

जय राम रमा रमनं समनं | Jai Ram Rama Ramnam | शिवजी ने प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी पर इसे गाया था

जय राम रमा रमनं समनं | Jai Ram Rama Ramnam | शिवजी ने प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी पर इसे गाया था

Sampoorn Ramayan Part 1 & 2 By Anuradha Paudwal, Babla Mehta I Audio Songs Jukebox

Sampoorn Ramayan Part 1 & 2 By Anuradha Paudwal, Babla Mehta I Audio Songs Jukebox

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:११४-१२०)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:११४-१२०)

श्रीराम-वाल्मीकि संवाद #मानसगान #RamcharitManas

श्रीराम-वाल्मीकि संवाद #मानसगान #RamcharitManas

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१२०-१२६)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१२०-१२६)

Live Video part 5 | Raga Shivranjani | Sankirtan Mandir Jafrabad | Jignesh Tilavat

Live Video part 5 | Raga Shivranjani | Sankirtan Mandir Jafrabad | Jignesh Tilavat

SAMPOORNA SUNDERKAND - SURESH WADKAR, ANURADHA PAUDWAL & DINESH KUMAR DUBE | Gudhi Padwa Special

SAMPOORNA SUNDERKAND - SURESH WADKAR, ANURADHA PAUDWAL & DINESH KUMAR DUBE | Gudhi Padwa Special

जड़-चेतन ग्रंथि खोलने में सहायक ज्ञानदीपक एवं भक्तिमणि  के प्रकाश का तुलनात्मक वर्णन #मानसगान

जड़-चेतन ग्रंथि खोलने में सहायक ज्ञानदीपक एवं भक्तिमणि के प्रकाश का तुलनात्मक वर्णन #मानसगान

रामचरितमानस Ramcharitmanas - Ramayan Siddh Chaupai | Bhakti Song | Ram Bhajan | Ram Charit Manas

रामचरितमानस Ramcharitmanas - Ramayan Siddh Chaupai | Bhakti Song | Ram Bhajan | Ram Charit Manas

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१०८-११४)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१०८-११४)

श्रीरामायणजी की आरती

श्रीरामायणजी की आरती

© 2025 ycliper. Все права защищены.



  • Контакты
  • О нас
  • Политика конфиденциальности



Контакты для правообладателей: [email protected]