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Автор: kabir Das Bhajan
Загружено: 2026-02-18
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"काल करे सो आज कर" संत कबीर दास जी का अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरणादायी दोहा है। इस अमर वाणी में कबीर जी ने समय का महत्व, जीवन की नश्वरता और कर्म की तात्कालिकता का संदेश दिया है। वे कहते हैं कि जो काम कल पर टालना चाहते हो, उसे आज ही कर लो, और जो काम आज करना चाहते हो, उसे अभी कर लो। क्योंकि जीवन क्षणभंगुर है और मृत्यु निश्चित है। यदि हम कार्यों को टालते रहेंगे, तो समय हाथ से निकल जाएगा और केवल पश्चाताप ही शेष रहेगा।
इस दोहे का भाव है – "काल करे सो आज कर, आज करे सो अब" अर्थात समय को कभी टालना नहीं चाहिए। कबीर जी हमें यह सिखाते हैं कि जीवन का हर क्षण अमूल्य है और इसे साधना, भक्ति और सतनाम में लगाना ही सच्चा उद्देश्य है।
🌿 भजन/दोहा का आध्यात्मिक संदेश
समय का महत्व: जीवन का हर क्षण अमूल्य है और इसे व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए।
कार्य की तात्कालिकता: जो कार्य करना है, उसे तुरंत करना चाहिए।
गुरु का मार्गदर्शन: गुरु ही वह शक्ति हैं जो जीव को सही दिशा दिखाते हैं।
भक्ति का सार: नाम‑स्मरण और ध्यान ही आत्मा को शुद्ध करते हैं और परमात्मा से जोड़ते हैं।
जीवन का उद्देश्य: आत्मा को परमात्मा से जोड़ना और समय का सदुपयोग करना ही साधना का सार है।
🎶 भावनात्मक प्रभाव
यह दोहा सुनते समय श्रोता को गहरी आत्मिक जागृति और जीवन के सत्य की अनुभूति होती है। कबीर जी की वाणी हमें यह याद दिलाती है कि समय को कभी टालना नहीं चाहिए। केवल भक्ति और गुरु की शरण ही जीवन को सार्थक बनाती है
🌟 निष्कर्ष
"काल करे सो आज कर" केवल एक दोहा नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। कबीर जी की वाणी हमें यह सिखाती है कि समय का सदुपयोग ही जीवन का सार है। गुरु की शरण और नाम‑स्मरण ही वह मार्ग है जो जीव को सच्ची मुक्ति और शांति प्रदान करता है। यह दोहा हर उस व्यक्ति के लिए है जो आत्मिक शांति, भक्ति और सत्य की खोज में है
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