पीतांबर धारी- है ब्रह्म वहीं! हिंदी कविता (श्री कृष्ण स्तुति) BY PENOFVIDHI •6 MONTHS OF CONSISTENCY
Автор: penofvidhi
Загружено: 2026-01-31
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WORDS AND AUDIO CREDIT VIDHI MAHESHWARI
कविता- "पीतांबर धारी- है ब्रह्म वही!" © विधि माहेश्वरी
वो कर्ता-धर्ता पालन-हारा
इस जग को चलाने वाला है
वो जगन्नाथ है वहीं राम
इन सांसों का रखवाला है।
है अटल वही है सत्य वही
वो कृपा-निधान अनुरागी है
है ब्रह्म वही ब्रह्मांड वही
है सूर्य किरण का तेज़ वहीं।
वो वायु है, है माटी भी
और जल की बहती धारा भी,
वो अम्बर का है नीलकंठ,
और अग्नि की है लपटन भी।
वो चित्रकार प्रकृति का,
और लिखी है जीवन-गाथा भी,
वो कष्ट भी है और मरहम भी
और कष्ट को हरने वाला भी।
है आत्म वहीं परमात्म वहीं
है सांसों का आधार वहीं,
है लक्ष्य वहीं, है मार्ग वहीं,
और पथ दिखलाने वाला भी।
है प्रेम वही विश्वास वही
शक्ति का रूप निराला है,
है कर्म वही है साक्ष्य वहीं
और न्याय दिलाने वाला भी,
है प्रश्न वही, है सब्र वहीं,
और उत्तर देने वाला भी।
है जन्म उसी से मरण उसी से
सब उसकी लिखी कहानी है,
वो भूमि पर जो लाया है,
है पार लगाने वाला भी।
है धरा ये जिससे अम्बर जिसका
वो शाश्वत पीतांबर धारी है,
अंश मात्र भूमि का कर्ण कर्ण
हर जीव उसी की माया है।
है ब्रह्म वही, ब्रह्मांड वहीं,
इस जग का है जगन्नाथ वहीं।।
~विधि माहेश्वरी
[कूबड़ वाली लीला, मीरा के गिरधर, अर्जुन के सारथी, श्री कृष्ण लीला]
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