vande mataram-original extended version(full length)
Автор: Shubhashish Ganguly
Загружено: 2014-05-30
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हमारे देश में वंदे मातरम की अनेकों रचनाएं youtube में उपलब्ध है प्रत्येक रचना अपने आप में अत्यंत सुंदर , कलात्मक और कल्पनाशील है
परंतु क्या आपने गौर किया है कि संपूर्ण वंदेमातरम अगर बिना संगति (ताल) के गाया जाए तो आप किस प्रकार से गाएंगे.... जो कि साधारणतया अनेकों कार्यक्रम में गाया जाता है
प्रस्तुत वंदे मातरम मूल रचना का विस्तारित रूप है वंदे मातरम के शेष चार अंतरों का संगीत निरूपण करने का प्रयास है
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how to sing complete Vande mataram.. .A hymn to the motherland composed by Jadhunath Chatterjee in 1950 in raag Desh is now presented by Shubhashish Ganguly with composition of last four verses handed by Mukesh kumar Sharma on keyboard, Ritu Tiwari on sitar, Ashish Ali on flute and Shampa Ganguly on taanpura.
संपूर्ण वंदे मातरम्
वन्दे मातरम्।
वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम् मलय़जशीतलाम्,
शस्यश्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। १।।
शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। २।।
कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
के बॉले माँ तुमि अबले,
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्। वन्दे मातरम्।। ३।।
तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणाः शरीरे,
बाहुते तुमि माँ शक्ति,
हृदय़े तुमि माँ भक्ति,
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम् ।। ४।।
त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,
नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्।। ५।।
श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्,
धरणीम् भरणीम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। ६।।
रचना -पूज्यनीय बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
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