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Автор: STUDY FOR JOB
Загружено: 2026-02-14
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BNS 270 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 "सार्वजनिक उपद्रव" (Public Nuisance) से संबंधित है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ऐसा कृत्य करता है या अवैध लोप (चूक) करता है, जिससे आम जनता को सामान्य खतरा, क्षति, बाधा या असुविधा होती है, तो वह इस धारा के तहत अपराधी है। यह अपराध जुर्माना या कारावास (मामले की गंभीरता के आधार पर) से दंडनीय है, भले ही इस कृत्य से किसी को कुछ सुविधा ही क्यों न मिल रही हो।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 272 (जो पहले IPC की धारा 270 थी) जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण तरीके से जीवन के लिए खतरनाक बीमारी फैलाने का कृत्य करने से संबंधित है। यह धारा ऐसे व्यक्ति को दंडित करती है जो जानता है कि उसका कार्य किसी जानलेवा बीमारी के संक्रमण को फैला सकता है। इसके तहत 2 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 273 "संगरोध (Quarantine) नियम की अवज्ञा" से संबंधित है। इसके तहत, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए क्वारंटाइन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे 6 महीने तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। यह धारा सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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