पेड़ों से लिपटकर दिया गया सबसे बड़ा बलिदान 😱
Автор: facts by gj
Загружено: 2026-01-28
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खेजड़ली बलिदान 😯
यह घटना 12 सितंबर 1730 को जोधपुर के खेजड़ली गांव में हुई थी |
जब जोधपुर के महाराजा अभय सिंह को अपने नए महल के लिए लकडिय़ों की आवश्यकता पड़ी तब उन्होंने सेनापति गिरधर दास भंडारी को यह आदेश दिया कि तुम खेजड़ली गांव में जाओ और वहां से खेजड़ी की लकड़ियां काट कर लेकर आओ |
बिश्नोई समुदाय के लोगों द्वारा हरे खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए पेड़ों को गले लगाकर प्राण न्यौछावर कर दिए |
जब राजा अभय सिंह को इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने गांव वालों से माफी मांगी |
अमृता देवी बिश्नोई (जिन्होंने कहा था) - "सिर सांतें रूख रहे तो भी सस्तो जाण"
अथार्थ :- यदि एक सिर देने से बदले एक पेड़ बच जाए, तो भी यह सौदा सस्ता है |
इस घटना में कुल 363 लोगों ने अपना बलिदान दिया |
प्रतिवर्ष 12 सितंबर 1978 से खेजड़ी दिवस मनाया जा रहा है |
और हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को खेजड़ली गांव में एकमात्र वृक्ष मेला भरता है |
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