SIDDHA KUNJIKA STOTRA - सिद्ध कुंजिका स्तोत्र - दुर्गा सप्तशती - एक शक्तिशाली गुप्त मंत्र
Автор: Sanatan Sangrah
Загружено: 2026-01-20
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SIDDHA KUNJIKA STOTRA - सिद्ध कुंजिका स्तोत्र - दुर्गा सप्तशती - एक शक्तिशाली गुप्त मंत्र
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र देवी दुर्गा की स्तुति का एक शक्तिशाली गुप्त मंत्र है, जो दुर्गा सप्तशती के पूर्ण पाठ के बराबर फल देता है, खासकर जब पूरा पाठ संभव न हो, इसमें 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र के साथ कई बीज मंत्र (जैसे ऐं, ह्रीं, क्लीं, क्रां, क्रीं, क्रूं) और दुर्गा के विभिन्न रूपों का आह्वान होता है, जिससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, शत्रु नाश होता है और जीवन के विघ्न दूर होते हैं, यह अत्यंत गोपनीय है और केवल भक्तों को ही बताया जाता है। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से सभी बाधाओं का नाश, मानसिक शांति, धन-धान्य की वृद्धि, शत्रुओं पर विजय, रोग मुक्ति और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है; यह देवी दुर्गा की कृपा पाने और दुर्गा सप्तशती के पूर्ण पाठ के बराबर फल देने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी स्तोत्र है, जो सभी मनोकामनाओं को पूरा करता है और परम सिद्धि प्रदान करता है।
मुख्य लाभ:
• सभी प्रकार की विघ्न-बाधाएं, जैसे ग्रह दोष, तंत्र-मंत्र का असर, आर्थिक समस्याएँ, और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
• धन प्राप्ति, करियर में उन्नति, विद्या में प्रगति, और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
• शारीरिक और मानसिक कष्टों से छुटकारा मिलता है, रोग दूर होते हैं और ऊर्जा प्राप्त होती है।
• शत्रुओं से छुटकारा और मुकदमों में जीत के लिए यह चमत्कारिक रूप से काम करता है।
• आत्मिक शांति, वाणी और मन को शक्ति मिलती है, तथा परम सिद्धि की प्राप्ति होती है।
• इस स्तोत्र के पाठ से दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ के बराबर पुण्य मिलता है
विशेष महत्व:
• यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के मंत्रों को जागृत (सिद्ध) करने का कार्य करता है, जिसके बिना सप्तशती का पाठ अधूरा माना जाता है।
• नवरात्रि के दौरान इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी होता है।
संक्षेप में, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, सुख और परम कल्याण के लिए अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली माना जाता है।
स्तोत्र का सार :
• भगवान शिव ने देवी पार्वती को बताया कि इस स्तोत्र के पाठ से देवी का जप सिद्ध होता है; कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास और अर्चन की आवश्यकता नहीं होती, केवल इसका पाठ ही संपूर्ण सप्तशती के फल के बराबर है।
• यह मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन और उच्चाटन जैसे सभी कार्यों को सिद्ध करता है, जिससे सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
• मुख्य मंत्र (Core Mantra): "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"।
पाठ विधि और नियम :
• पाठ से पहले हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर मनचाही इच्छा बोलें और संकल्प करें।
• रात 9 बजे के बाद का समय उत्तम माना जाता है, लेकिन प्रतिदिन भी कर सकते हैं।
• यह अत्यंत गोपनीय है, अभक्तों को न दें। ब्रह्मचर्य का पालन करें और जमीन पर सोएं।
• प्रतिदिन अनार का भोग लगाएं और लाल फूल अर्पित करें।
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