कालभैरव अष्टकम || Kalabhairava Ashtakam ||
Автор: Bhavishya Darpan Jyotish Vigyan Kendra
Загружено: 2026-02-08
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काल भैरव अष्टकम भगवान शिव के काल भैरव रूप की स्तुति में रचित एक शक्तिशाली आठ-श्लोकीय स्तोत्र है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह पाठ भय, संकट, नकारात्मक ऊर्जा और दुखों का नाश करता है, जिससे जीवन में सुख, सुरक्षा और अनुशासन आता है। यह कालसर्प और राहु-केतु जैसे दोषों को शांत करने के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
काल भैरव अष्टकम की महिमा और लाभ
:
भय और बाधाओं का नाश: यह अष्टकम् भक्तों को सभी प्रकार के भय, शत्रु, और तंत्र-मंत्र के दुष्प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है।
नकारात्मकता दूर करना: काल भैरव अष्टकम का जाप मानसिक अशांति, तनाव, लोभ और मोह जैसे विकारों को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
ग्रह दोष मुक्ति: इस स्तोत्र के पाठ से कुंडली में राहु-केतु और कालसर्प दोष के कारण आ रही परेशानियां कम होती हैं।
मोक्ष और ज्ञान: यह आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है और भक्त को ज्ञान व मोक्ष प्राप्ति में सहायक है।
अनुशासन और सफलता: यह जीवन में समय की पाबंदी, अनुशासन और सफलता पाने के लिए भगवान काल भैरव का आशीर्वाद दिलाता है।
पाठ के नियम:
भैरव अष्टमी (वार्षिक) या किसी भी शनिवार/रविवार को इस पाठ की शुरुआत करना विशेष फलदायी है।
सुबह या शाम के समय, स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनकर इसका पाठ करना चाहिए।
नियमित पाठ से काल भैरव की कृपा बनी रहती है।
काल भैरव अष्टकम का मुख्य मंत्र:
"काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे"
(अर्थ: काशी के नाथ कालभैरव की मैं वंदना करता हूँ)
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