अघोराचार्य श्री बाबा कीनाराम जी 🙏🏻
Автор: Vinay Video Creator And Nature Video
Загружено: 2025-08-19
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🙏 जय बाबा कीनाराम जी 🙏
इस वीडियो में देखिए रामगढ़, चंदौली (U.P.) में लगने वाले बाबा कीनाराम जी मेले की झलक।
हर साल यहाँ हजारों भक्त दर्शन करने और मेले का आनंद लेने आते हैं।
इस भव्य आयोजन में भक्ति, आस्था और संस्कृति की अनोखी झलक मिलती है।
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👉 Comments में लिखें – जय बाबा कीनाराम 🚩
📍 Location: Ramgarh, Chandauli (U.P.)
🎡 Event: Baba Kina Ram Ji Mela 2025
श्री बाबा कीनाराम एक प्रसिद्ध अघोरी संत और अघोर संप्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं। उनका जन्म 1601 ई. में वाराणसी के पास चंदौली जिले के रामगढ़ गांव में हुआ था। वे भगवान शिव के अवतार माने जाते थे और उन्हें अघोर विद्या में महारत हासिल थी।
जन्म और प्रारंभिक जीवन:-
बाबा कीनाराम का जन्म एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता, अकबर सिंह और मनसा देवी, गरीब और साधारण दंपत्ति थे। किंवदंती है कि मनसा देवी ने एक सपने में एक दिव्य बालक के जन्म का पूर्वाभास किया था। कुछ दिनों बाद, तीन साधुओं ने उनके घर आकर बच्चे को आशीर्वाद दिया। सबसे बड़े साधु ने बच्चे के कान में कुछ मंत्र फूंके, जिससे उसे विशेष आशीर्वाद मिला। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यदि वह अपने माता-पिता के साथ रहता तो उसका जीवन अल्पायु होता। इसलिए, उसे एक पड़ोसी को दे दिया गया और बाद में, उसे वापस खरीद लिया गया। इसी कारण उनका नाम "कीना" पड़ा, जिसका अर्थ है "खरीदा हुआ"।
अघोर पंथ में दीक्षा:-
बाबा कीनाराम ने 12 वर्ष की आयु में गृहत्याग कर दिया और अघोर पंथ के गुरु, बाबा शिवादास की शरण में चले गए। बाबा शिवादास ने उनकी आध्यात्मिक क्षमता को पहचाना और उन्हें अघोर विद्या की दीक्षा दी।
सिद्धियाँ और चमत्कार:-
बाबा कीनाराम को कई सिद्धियाँ प्राप्त थीं। उन्होंने कई चमत्कार किए, जैसे कि एक मुर्दे को जीवित करना, लोगों को शाप देना और आशीर्वाद देना।
अघोर पंथ का प्रचार:
बाबा कीनाराम ने अघोर पंथ का पूरे भारत में प्रचार किया। उन्होंने अघोर विद्या को आम लोगों तक पहुंचाया और उनके जीवन को बेहतर बनाने में मदद की।
महासमाधि:-
बाबा कीनाराम ने 1771 ई. में महासमाधि ली। उनका समाधि स्थल वाराणसी के क्रीं-कुंड में स्थित है, जो अघोरियों और अघोरी भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
अन्य महत्वपूर्ण बातें:
बाबा कीनाराम को अघोर पंथ का संस्थापक माना जाता है।
उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है।
उन्होंने अघोर विद्या पर कई ग्रंथ लिखे, जैसे "विवेकसार", "रामगीता", "रामरसाल" और "उन्मुनिराम"।
बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुंड, अघोरियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
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