निंदक नियरे राखिए – कबीर का जीवन दर्शन, आत्मचिंतन और लोकतंत्र का सत्य
Автор: SVRJ Brand
Загружено: 2026-02-17
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क्या आलोचना वास्तव में बुरी होती है?
क्या निंदक हमारा शत्रु है या सच्चा हितैषी?
कबीर दास का प्रसिद्ध दोहा “निंदक नियरे राखिए” केवल एक साहित्यिक पंक्ति नहीं है, बल्कि यह जीवन को दिशा देने वाला गहरा दर्शन है। इस विस्तृत व्याख्यान में हमने निंदक और चाटुकार के अंतर, आत्म-आलोचना के महत्व, लोकतंत्र में आलोचना की भूमिका, संविधानिक मर्यादा, तथा आध्यात्मिक दृष्टि से आत्म-चिंतन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है।
यह वीडियो आपको सिखाएगा —
✔ आलोचना को सही दृष्टि से कैसे देखें
✔ रचनात्मक और विनाशकारी निंदा में अंतर
✔ अहंकार और आत्म-विकास का संबंध
✔ कबीर का सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश
✔ लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना का महत्व
यदि आप अपने व्यक्तित्व को निखारना चाहते हैं,
यदि आप गहराई से विचार करना पसंद करते हैं,
तो यह व्याख्यान आपके लिए है।
वीडियो को अंत तक अवश्य देखें और अपने विचार कमेंट में साझा करें।
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