देश विदेश हौं फिरा | Sant Kabir Ramani Bhajan | Truth Beyond Mind | Kabir Amritvani |
Автор: Kabira
Загружено: 2026-02-05
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Sant Kabir के इस गहन रामणी भजन में कबीर साहब मनुष्य की सबसे बड़ी भूल को उजागर करते हैं — सत्य को बाहर ढूंढना।
“देश विदेश हौं फिरा, मनहीं भरा सुकाल”
कबीर कहते हैं कि पूरी दुनिया मन की कल्पनाओं से भरी हुई है, लेकिन जिस सत्य, विवेक और सद्गुरु को हम खोजते हैं — वह दुर्लभ हो गया है।
यह भजन Bijak की Ramani पर आधारित है, जिसमें
– मन के राज
– झूठे ज्ञान का बाजार
– सच्चे गुरु का अभाव
– और भीतर बसे साहेब की पहचान को शास्त्रीय कथा-भजन शैली में प्रस्तुत किया गया है। यह गीत उन साधकों के लिए है जो
भक्ति को दिखावा नहीं, और ज्ञान को अनुभव मानते हैं।
🎶 यह भजन Kabir Amritvani, Indian Classical Bhajan और Spiritual Katha शैली में रचा गया है।
अगर आप Sant Kabir, Bhajan, Ramani, Bijak, Vedantic wisdom और inner truth में रुचि रखते हैं — यह भजन आपके लिए है।
🙏 सुनें, समझें और भीतर की यात्रा शुरू करें।
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