Tribhujon ki sarvangsamata || tribhujon ki sarvangsamata ke niyam || sarvangsamata ki kasotiya ||
Автор: Atal classes
Загружено: 2026-02-28
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इस वीडियो में त्रिभुजों की सर्वांगसमता को बताया गया है. त्रिभुजों की सर्वांगसमता के बारे में मुख्य बातें जो इस वीडियो में बताई गई हैं:
सर्वांगसमता क्या होती है?
सर्वनाम समता के क्या-क्या नियम हैं?
सर्वांगसमता के उपयोग
CPCT का अर्थ
जब दो त्रिभुज आकार (Shape) और माप (Size) में बिल्कुल एक जैसे होते हैं, तो उन्हें *सर्वांगसम (Congruent)* कहा जाता है।
इसका अर्थ है कि यदि आप एक त्रिभुज को उठाकर दूसरे के ऊपर रखें, तो वह उसे पूरी तरह से ढँक लेगा।
सर्वांगसमता के नियम (Rules of Congruence)
1. SSS (भुजा-भुजा-भुजा)
यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ, दूसरे त्रिभुज की तीनों संगत (Corresponding) भुजाओं के बराबर हों।
2. SAS (भुजा-कोण-भुजा)
यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनके **बीच का कोण**, दूसरे त्रिभुज की दो संगत भुजाओं और उनके बीच के कोण के बराबर हो।
*ध्यान दें:* कोण हमेशा उन्हीं दो भुजाओं के बीच का होना चाहिए जो बराबर हैं।
3. ASA (कोण-भुजा-कोण)
यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनके **बीच की भुजा**, दूसरे त्रिभुज के दो संगत कोणों और उनकी बीच की भुजा के बराबर हों।
4. AAS (कोण-कोण-भुजा)
यदि दो त्रिभुजों में दो कोणों के जोड़े बराबर हों और एक ऐसी भुजा बराबर हो जो उन कोणों के बीच में स्थित नहीं है।
5. RHS (समकोण-कर्ण-भुजा)
यह नियम केवल *समकोण त्रिभुज (Right-angled triangle)* पर लागू होता है।
दोनों त्रिभुजों में एक कोण 90° होना चाहिए।
दोनों का *कर्ण (Hypotenuse)* बराबर होना चाहिए।
कोई भी एक अन्य भुजा बराबर होनी चाहिए।
CPCT क्या है?
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जब दो त्रिभुज सर्वांगसम सिद्ध हो जाते हैं, तो उनके बाकी बचे हुए भाग (कोण और भुजाएँ) भी स्वतः ही बराबर हो जाते हैं। इसे *CPCT* (Corresponding Parts of Congruent Triangles) कहा जाता है।
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