आपका शत्रु ही आपका सबसे। अच्छा मित्र है
Автор: Dhyan Yogi motivation
Загружено: 2025-08-13
Просмотров: 141
Описание:
ओशो के अनुसार, "आपका दुश्मन ही आपका मित्र है" यह सिद्धांत द्वैतवाद (dualism) पर आधारित है। ओशो का मानना है कि हर चीज के दो पहलू होते हैं, और दुश्मन और मित्र भी जीवन के दो पहलू हैं जो एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दुश्मन आपको अपनी सीमाओं और कमजोरियों को समझने में मदद करता है, जबकि मित्र आपके विकास और खुशी में सहायक होता है।
ओशो के अनुसार, द्वैतवाद एक भ्रम है। वास्तविकता में, सब कुछ एक ही है, और दुश्मन और मित्र भी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब आप किसी को अपना दुश्मन मानते हैं, तो आप वास्तव में अपने भीतर की एक नकारात्मक प्रवृत्ति को देख रहे होते हैं। जब आप किसी को अपना मित्र मानते हैं, तो आप अपने भीतर की एक सकारात्मक प्रवृत्ति को देख रहे होते हैं।
ओशो कहते हैं कि द्वैतवाद से मुक्त होने का एक तरीका यह है कि आप अपने भीतर के "शत्रु" को स्वीकार करें और उसे "मित्र" के रूप में देखें। जब आप ऐसा करते हैं, तो आप अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को स्वीकार करना और उनसे सीखना शुरू कर देते हैं। यह आपको अधिक जागरूक, अधिक सहज और अधिक प्रेमपूर्ण व्यक्ति बनने में मदद करता है।
ओशो का यह भी मानना है कि शत्रु और मित्र दोनों ही आपके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शत्रु आपको अपनी सीमाओं और कमजोरियों को समझने में मदद करता है, जबकि मित्र आपको अपनी ताकत और क्षमताओं को विकसित करने में मदद करता है। इसलिए, आपको दोनों को समान रूप से महत्व देना चाहिए और उनसे सीखना चाहिए।
संक्षेप में, ओशो का "शत्रु ही मित्र है" का सिद्धांत यह है कि जीवन में हर चीज एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, और दुश्मन और मित्र दोनों ही आपके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आपको अपने भीतर के "शत्रु" को स्वीकार करना चाहिए और उससे सीखना चाहिए, और आपको दोनों को समान रूप से महत्व देना चाहिए।
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: