तुरिया, तुरी और तिउर को अनुसूचित जाति में शामिल कराने की मांग ...
Автор: Khabri chowk
Загружено: 2022-05-25
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सरकार आर्थिक रूप में कमजोर जातियों को आरक्षण का लाभ देकर समाज के उत्थान की कवायद कर रही है,लेकिन अलग- अलग सरनेम एवं उच्चारण अथवा जाति लिखने में छोटी-छोटी गलतियों के कारण कई लोग अपने हक के लिए दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं,दरअसल सरगुजा जिले के वनांचल क्षेत्र में रहने वाले अनुसूचित जाति तुरिया, तूरी और तिऊर अपने-अपने जाति एवं सरनेम को लेकर उलझे हुए हैं
वीओ 1- छत्तीसगढ़ में औसतन 12 प्रतिशत से ज्यादा अनुसूचित जाति निवास करती हैं.. वहीं ग्रामीणों का कहना है कि तुरिया, तूरी और तिऊर तीनों एक ही जाति में आते हैं.. प्रशासनिक सेटलमेंट के दौरान तुरिया जाति को अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं रखा गया..जिसकी वजह से आज तूरिया जाति सरकार की ओर से मिलने वाले योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं... वहीं स्कूली छात्रों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है.. जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है..
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