कब्ज़ा या समाज सेवा?“सेना अफसर की खुली चुनौती!” एमएस मलिक की खुली चुनौती,साबित करो मैंने गड़बड़ी की?
Автор: Gramin Bharat (ग्रामीण भारत)
Загружено: 2026-02-14
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हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन सिर्फ एक राजनीतिक लड़ाई नहीं था, बल्कि हजारों युवाओं की उम्मीदों और कई परिवारों की कुर्बानी की कहानी भी है। वर्ष 2010 के बाद 2016 में हुआ आंदोलन बेहद उग्र रहा, जिसमें कई नौजवानों ने अपनी जान गंवाई। जाट समाज आज भी उन्हें शहीद मानकर याद करता है।
इसी आंदोलन के दौरान और बाद में देश-विदेश से समाज ने बड़ा चंदा इकट्ठा किया। उद्देश्य था — समाज के बच्चों की शिक्षा, भविष्य और स्थायी संस्थान की स्थापना। इसी सोच के तहत रोहतक के जसिया गांव में छोटूराम धाम की योजना बनी, जहां आज एक बड़ी बिल्डिंग लगभग तैयार है और बच्चे कोचिंग व आधुनिक शिक्षा ले रहे हैं।
लेकिन समय के साथ इस पूरे प्रोजेक्ट और फंड को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।
पहले चौधरी यशपाल सिंह मलिक पर चंदे की गड़बड़ी के आरोप लगे। अब जाट सेवा संघ के जनरल सेक्रेटरी एमएस मलिक — जो भारतीय वायुसेना से रिटायर्ड विंग कमांडर हैं — उन पर धाम कब्ज़ा करने, अपने बच्चों को सेट करने और मनमानी चलाने जैसे आरोप लगाए गए।
ग्रामीण भारत के पॉडकास्ट में एमएस मलिक ने खुलकर जवाब दिया।
उन्होंने कहा—
“मैं एक रिटायर्ड फौजी हूँ। मैंने यहां सिर्फ दान दिया है, लोगों से दिलवाया है। कोई भी सामने आकर साबित कर दे कि मैंने गड़बड़ी की है। समाज अगर मुझे दंड देगा, मैं स्वीकार करूंगा।”
उन्होंने साफ कहा कि जाट आरक्षण और जाट सेवा संघ दोनों अलग-अलग हैं। जाट सेवा संघ का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा के जरिए समाज को आगे बढ़ाना है। आरक्षण आंदोलन में जिन बच्चों पर मुकदमे हुए, उनकी मदद का सवाल अलग मंच का विषय है।
एमएस मलिक ने यह भी दावा किया कि खुद यशपाल मलिक ने पहले कहा था कि आरक्षण की लड़ाई और जाट सेवा संघ का काम अलग रहेगा, लेकिन अब उसी बात से पीछे हट रहे हैं।
उन्होंने डीड में गड़बड़ी के आरोप लगाए और बताया कि जाट आंदोलन के समय बने झा आयोग के सामने उन्होंने समाज का पक्ष मजबूती से रखा था।
एमएस मलिक फिलहाल गुरुग्राम में रहते हैं और दावा करते हैं कि वहीं से समाज के लिए बड़ा चंदा जुटाया गया।
पॉडकास्ट में दोनों पक्षों के बीच निजी आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए, जिस पर यही कहा जा सकता है कि सामाजिक पदों पर बैठे लोगों को व्यक्तिगत बयानबाजी से बचना चाहिए।
यह वीडियो सिर्फ आरोपों की कहानी नहीं, बल्कि जाट आंदोलन, समाज के फंड और जसिया छोटूराम धाम की हकीकत समझने की कोशिश है।
अब फैसला समाज और दर्शकों का है—
क्या यह शिक्षा का मिशन है
या फिर नेतृत्व की खींचतान?
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