कौन है तुम्हारा? कोई नहीं! | Jagat Mein Koi Nahi Apna | Nirgun Bhajan
Автор: Zindgi Ka Safar
Загружено: 2026-03-10
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हम पूरी जिंदगी यह भ्रम पालते हैं कि ये परिवार, ये दोस्त और ये शरीर हमारा है। लेकिन कबीर साहेब कहते हैं कि यह सब एक "खुली आँखों का सपना" है।
भजन "कोई नहीं अपना" आपको यह अहसास दिलाएगा कि शमशान के आगे कोई साथ नहीं जाता, वहां जीव को अकेले ही अपनी यात्रा करनी होती है।
यह भजन सुनें और मन को शांत करें।
"घर की नारी द्वार तलक है, रिश्तेदार सब मरघट तक..."
"सोना जैसी काया जल गई, कोई न आया पास..."
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