कलयुग तू एक कल्पना है - ये काला सर ही तुम्हारे घर का काल होता है || Best Motivational Parvachan ||
Автор: Jinsharnam Media Official
Загружено: 2021-06-24
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अब अशुध्दि के लिए शुद्ध होना चाहता हूँ।
कुबुद्धि के लिए बुद्ध होना चाहता हूँ।
और चाहता हूँ इस जगत में शांति चारो और हो।
इस जगत के प्रेम पर में कृद होना चाहता हूँ।
चाहता हूँ तोड़ देना सत्य की सारी दीवारे।
चाहता हूँ मोड़ देना शांति की सारी गुहारे।
चाहता हूँ इस धरा पर दृष फुले और फले।
चाहता हूँ इस जगत के हर हृदय में छल पले।
मै नहीं रावण कि तुम आओ और मुझे मार दो।
मै नहीं वह कंस जिसकी वहां तुम उखाड़ दो।
मै जगत हूँ अधिष्ठाता मुझे पहचान लो।
हर हृदय में, मै वसा हूँ बात मेरी मान लो।
अब तुम्हारे भक्त भी मेरी पकड़ में आ गए है।
अब तुम्हारे संत जन वेहद अकड़ में आ गए है।
मारना है मुझ को तो, पहले इन्हे तुम मर दो।
और युद्ध करना चाहो तो पहले इन्ही से तुम रार लो।
ये तुम्हारे भक्त ही अब धुर विरोधी हो गए।
ये तुम्हारे संत जन, अब विकट क्रोधी हो गए है।
मै नहीं वश का तुम्हारे राम , कृष्णा और वृद्ध का
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