फाइब्रॉएड / रसौली का बिना ऑपरेशन इलाज | Fibroid treatment without operation | Hindi
Автор: Dr. Mudita Jain Talesra
Загружено: 2024-10-08
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इस वीडियो में आप जानेंगे:
फाइब्रॉइड (जिसे ल्योमायोमा या मायोमा भी कहा जाता है) गर्भाशय में बनने वाले गैर-कैंसरस ट्यूमर होते हैं। ये महिलाओं में आम समस्या हैं, खासकर प्रजनन उम्र के दौरान। यहां कुछ महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं:
1. फाइब्रॉइड क्या होते हैं?
फाइब्रॉइड गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार में विकसित होते हैं।
ये गैर-कैंसरस होते हैं और महिलाओं में प्रजनन आयु (15 से 50 साल के बीच) में सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं।
2. फाइब्रॉइड के प्रकार
इंट्राम्यूरल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार के भीतर होते हैं और सबसे आम प्रकार के होते हैं।
सबम्यूकस फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय की आंतरिक परत के करीब होते हैं और अधिक गंभीर लक्षण पैदा कर सकते हैं।
सबसेरोजल फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय के बाहर की तरफ बढ़ते हैं और पेट की तरफ दबाव डाल सकते हैं।
पेडंकुलेटेड फाइब्रॉइड: ये गर्भाशय से एक पतले डंठल के जरिए जुड़े होते हैं।
3. फाइब्रॉइड के लक्षण
अत्यधिक मासिक धर्म रक्तस्राव (हेवी पीरियड्स)।
मासिक धर्म के बीच या असामान्य समय पर रक्तस्राव।
पेट में दर्द या भारीपन।
पेशाब की बार-बार जरूरत महसूस होना।
सेक्स के दौरान दर्द।
पीठ और पैरों में दर्द।
बांझपन या गर्भधारण में कठिनाई।
4. फाइब्रॉइड का कारण
हार्मोनल बदलाव: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन फाइब्रॉइड के विकास में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
आनुवंशिकता: यदि परिवार में किसी को फाइब्रॉइड हुआ है, तो इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
मोटापा: अधिक वजन होने से फाइब्रॉइड का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण फाइब्रॉइड तेजी से बढ़ सकते हैं।
5. फाइब्रॉइड का निदान
अल्ट्रासाउंड: सबसे आम तरीका, जिसमें गर्भाशय की तस्वीरें ली जाती हैं।
एमआरआई (MRI): यह फाइब्रॉइड के आकार, संख्या और सटीक स्थिति को स्पष्ट रूप से दिखा सकता है।
सोनोहिस्टेरोग्राफी: इसमें गर्भाशय में तरल पदार्थ डालकर अल्ट्रासाउंड किया जाता है, ताकि अंदर की परत को अच्छी तरह देखा जा सके।
हिस्टेरोस्कोपी: इस प्रक्रिया में गर्भाशय में एक कैमरा डाला जाता है जिससे गर्भाशय की अंदरूनी परत को देखा जा सके।
6. फाइब्रॉइड से होने वाली समस्याएं
लंबे समय तक अत्यधिक रक्तस्राव से एनीमिया (रक्त की कमी) हो सकता है।
प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे गर्भधारण में कठिनाई या गर्भपात का खतरा।
बड़े फाइब्रॉइड पेट में दबाव डाल सकते हैं जिससे अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
7. फाइब्रॉइड का उपचार
दवाएं: हार्मोनल थेरेपी, दर्दनिवारक दवाएं और आयरन सप्लिमेंट्स।
गैर-सर्जिकल उपचार: गर्भाशय धमनी एम्बोलाइजेशन (UAE), जिसमें रक्त की आपूर्ति बंद करके फाइब्रॉइड का आकार घटाया जाता है।
सर्जरी: मायोमेक्टॉमी (फाइब्रॉइड को हटाना), हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय को पूरी तरह निकालना)।
8. फाइब्रॉइड से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां
35 साल की उम्र के बाद 70-80% महिलाओं में फाइब्रॉइड होने की संभावना होती है।
हर महिला में फाइब्रॉइड के लक्षण नहीं होते; कुछ महिलाएं बिना किसी लक्षण के भी फाइब्रॉइड के साथ जीवन जीती हैं।
हार्मोनल असंतुलन और आनुवंशिक कारक फाइब्रॉइड के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
फाइब्रॉइड की गंभीरता और लक्षणों के आधार पर इसका इलाज तय किया जाता है। यदि लक्षण गंभीर हों तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
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Disclaimer: This video is made for patient education and awareness purpose only. For any medical problem it is advised to consult a doctor physically and take treatment as advised by your doctor. This information should not be used for diagnosis or treatment of any medical problem or disease.
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Dr. Mudita
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