Shri Yash Dewale Raag Vibhas(Marva Thath). Ragayan Sangeet Samaroh 2025.
Автор: swar sanskar
Загружено: 2025-07-07
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राग विभास
स्वर मध्यम व निषाद वर्ज्य। रिषभ व धैवत कोमल। शेष शुद्ध स्वर।
जाति औढव - औढव
थाट भैरव
वादी - संवादी धैवत - रिषभ
समय दिन का प्रथम प्रहर
विश्रांति स्थान रे१; प; ध१;
मुख्य अंग प ध१ ध१ प ; ग प ग रे१ सा ;
आरोह - अवरोह सा रे१ ग प ध१ सा' - सा' ध१ प ग रे१ सा ;
राग देशकार के रिषभ और धैवत कोमल कर देने से ही राग विभास बन जाता है। इस राग में राग भैरव के समान रिषभ और धैवत पर आंदोलन नही करना चाहिये। इस राग में गंधार और पंचम की संगति बहुत मधुर लगती है, जैसे – प ध१ प ग प ; सा ग प ग प ; सा’ ध१ प ग प। इस राग में तान के अंत में पंचम पर न्यास किया जाता है जैसे – प ध१ प ग प ; ध१ सा’ ध१ प ध१ प ग प ; ग प ध१ प ग प ग रे१ सा।
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