होरी खेले रघुवीरा हाँ हिलमिल आवे लोग लुगाईभई महलन में भीरा अवध में
Автор: Janak j Sanghvi Sanatani
Загружено: 2026-03-01
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होरी खेले रघुवीरा अवध में होरी खेले रघुवीरा
हाँ हिलमिल आवे लोग लुगाई
भई महलन में भीरा अवध में
होरी खेले रघुवीरा...
इनको शर्म नहीं आये देखे नाहीं अपनी उमरिया
साठ बरस में इश्क लड़ाए
मुखड़े पे रंग लगाए, बड़ा रंगीला सांवरिया
चुनरी पे डाले अबीर अवध में
होरी खेरे रघुवीरा...
देखे है ऊपर से झाँके नहीं अन्दर सजनिया
उम्र चढ़ी है दिल तो जवान है
बाहों में भर के मुझे ज़रा झनका दे पैंजनिया
साँची कहे है कबीरा अवध में
होरी खेले रघुवीरा...
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