अंधियारे में क्या ढूंढता बंदे भजन । प्रेम रावत महाराज
Автор: Sukoon With Sooraj
Загружено: 2026-02-05
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"प्रेमियों, हम सारी उम्र खुशी और सुकून को बाहर की दुनिया में ढूँढते रहते हैं। कभी तीरथों में, तो कभी दुनिया के मेलों में। लेकिन संत-महात्मा हमें याद दिलाते हैं कि कस्तूरी (सुगंध) मृग की नाभि में ही होती है, और वो उसे पूरे जंगल में ढूँढता है। यह भजन उसी भाव को दर्शाता है कि प्रभु का सच्चा निवास हमारे हृदय रूपी मंदिर में है। आइए, इस भाव में डूबते हैं—'दीया तेरे भीतर है'।"
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