अध्याय 6 : ध्यान योग | Chapter 6 – Shrimad Bhagavad Gita Hindi Audiobook
Автор: Sanatana Hindu
Загружено: 2026-02-13
Просмотров: 107
Описание:
🕉️ JAI SHRI KRISHNA
Welcome to **Shrimad Bhagavad Gita/Geeta – Chapter 6 (Dhyana Yoga)**,
the chapter where Lord Shri Krishna reveals
the science of meditation,
the discipline of the mind,
and the path to true inner mastery.
In this chapter, Krishna explains
how to control the restless mind,
how to practice meditation with balance and discipline,
and how a yogi rises above sorrow, duality, and mental disturbance.
This chapter is a complete spiritual guide
for anyone seeking peace, focus, stability,
and self-realization in modern life.
_____
🕉️ जय श्रीकृष्ण
आप सुन रहे हैं —
*श्रीमद्भगवद्गीता/गीता | अध्याय 6 : ध्यान योग*
यह अध्याय
मन के स्वभाव,
उसकी चंचलता,
और उसे नियंत्रित करने की
व्यवस्थित साधना को विस्तार से समझाता है।
अध्याय 5 में कर्म और संन्यास की स्पष्टता के बाद
अब भगवान श्रीकृष्ण
योग की आंतरिक साधना — ध्यान — का मार्ग बताते हैं।
अर्जुन का प्रश्न है —
मन अत्यंत चंचल है,
वायु से भी अधिक अस्थिर।
ऐसे मन को नियंत्रित करना क्या संभव है?
भगवान श्रीकृष्ण उत्तर देते हैं —
*अभ्यास और वैराग्य से मन को वश में किया जा सकता है।*
_____
इस अध्याय में प्रमुख शिक्षाएँ:
• सच्चा योगी वही है जो मन को संयमित कर सके
• संतुलित आहार, व्यवहार और विचार योग का आधार हैं
• ध्यान के लिए एकांत, शुद्धता और स्थिर आसन आवश्यक हैं
• मन को बार-बार ईश्वर में स्थापित करना ही साधना है
• योग मार्ग पर किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता
_____
भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि —
मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है
और स्वयं ही अपना शत्रु।
यदि मन नियंत्रित है
तो वही आत्मोन्नति का साधन है,
और यदि अनियंत्रित है
तो वही पतन का कारण बनता है।
योगी वह है —
जो सुख-दुःख,
मान-अपमान,
लाभ-हानि में समभाव रखे।
_____
यह अध्याय हमें सिखाता है कि —
• ध्यान मानसिक शांति का विज्ञान है
• अनुशासन के बिना योग संभव नहीं
• संयमित जीवन ही स्थिर चित्त का आधार है
• आध्यात्मिक उन्नति क्रमिक प्रक्रिया है
• असफल साधक भी अगले जन्म में आगे बढ़ता है
भगवान श्रीकृष्ण
अर्जुन को आश्वस्त करते हैं कि
योगी कभी नष्ट नहीं होता।
_____
इस अध्याय के प्रमुख विषय:
• ध्यान की विधि और आसन
• मन का स्वभाव और उसका नियंत्रण
• अभ्यास और वैराग्य का महत्व
• योगभ्रष्ट की स्थिति
• समत्व और आत्मानुभूति
_____
यह अध्याय विशेष रूप से उपयोगी है:
• ध्यान सीखने वाले साधकों के लिए
• मानसिक तनाव और अशांति से जूझ रहे लोगों के लिए
• एकाग्रता बढ़ाने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए
• आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने वालों के लिए
• जीवन में संतुलन खोजने वालों के लिए
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इस *Shrimad Bhagavad Gita/Geeta Audiobook Series* में:
• सभी 18 अध्याय क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किए जा रहे हैं
• प्रत्येक अध्याय का भाव, संदर्भ और जीवन-संदेश दिया जाता है
• शुद्ध सनातन दृष्टिकोण बनाए रखा गया है
यह श्रृंखला
किसी मत-वाद या विवाद के लिए नहीं,
बल्कि **आत्मबोध, मनःशांति
और आध्यात्मिक उन्नति** के लिए है।
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आपके मन में ध्यान के प्रति प्रेरणा,
आत्मिक शांति
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जय श्रीकृष्ण 🦚
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⚠️ अस्वीकरण (DISCLAIMER – LEGAL & SPIRITUAL)
यह भजन
आध्यात्मिक साधना, भक्ति और आत्मचिंतन के उद्देश्य से
तैयार किया गया है।
गीत के शब्द, भाव और प्रस्तुति
शास्त्रीय परंपरा, भक्ति-साहित्य
और मानवीय विवेक के आधार पर निर्मित हैं।
इसे किसी भी प्रकार का
अंतिम, पूर्ण या त्रुटिरहित शास्त्रीय निर्णय न माना जाए।
श्रवण की सुविधा और भाव-संपूर्णता हेतु
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रचनात्मक दिशा और भावात्मक नियंत्रण
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