Panipat 10Rs food: इस canteen में मिलता है 10 रुपये में घर जैसा भरपेट खाना |
Автор: News18 Haryana
Загружено: 2023-09-04
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सुमित भारद्वाज/ पानीपत. कहते हैं खाना हो तो घर का और ये घर का खाना अगर घर से बाहर मिल जाये तो क्या बात हो और वो भी मात्र 10 रुपये में.जी हां पानीपत में खुल गई है एक ऐसी ही कैंटीन जहां मात्र 10 रुपये में आप पेटभर कर खाना खा सकेंगे.दरअसल श्रम विभाग की तरफ से पानीपत के कुटानी रोड वर्मा चौक पर एक ऐसी कैंटीन खुल गई है.जहां मजदूर, ऑटो चालक, रिक्शा चालक, दिव्यांग और तमाम मजदूर वर्ग मात्र 10 रुपये में खाना खा सकते हैं.
बता दें कि इस कैंटीन में मात्र दस रुपये की थाली में आपको दो सब्जियां,चार रोटी और चावल मिलेंगे.इतना ही नहीं श्रम विभाग की तरफ से शुरू की गई इस योजना से ना सिर्फ गरीबों को 10 रुपये में निवाला मिलेगा बल्कि 10 से 15 लोगों को रोज़गार भी मिल रहा है. श्रम विभाग की इस योजना से महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह तैयार किया गया है जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं.ये सभी 10 महिलाएं खाना बनाने से लेकर परोसने तक का सब काम करती हैं.
'महिलाओं को मिल रहा है रोजगार'
वहीं ये महिलाएं राशन लाने का काम भी खुद ही करती हैं. पूजा स्वयं सहायता समूह की सचिव रानी ने बताया कि सरकार की यह बेहद अच्छी योजना है जिससे न सिर्फ गरीबों को भोजन मिल रहा है.वहीं हम जैसी महिलाएं जो घर बैठीं थीं उन्हें रोज़गार भी मिल रहा है.उन्होंने बताया की थाली में चार रोटी चावल और दो सब्जियां मिल रही हैं.इतना ही नहीं उन्होंने कहा अगर किसी को एक्स्ट्रा सब्जी की जरूरत पड़ती है तो हम उसे मना भी नहीं करते हैं.
सौगात से कम नहीं है ये कैंटीन
इस योजना के अंतर्गत वह 10 रुपये खाना खाने वालों से लेते हैं तो वहीं 25 रुपये सरकार की तरफ से उन्हें सहायता के रूप में मिलते हैं.जब से उन्होंने यह कैंटीन शुरू की है काफी लोग यहां पर भोजन करने आ रहे हैं पिछले कुछ दिनों से तो यहां 600 से 700 लोग रोजाना भोजन कर रहे हैं. वहीं कैंटीन में भोजन करने पहुंचे मज़दूर ने बताया कि यह कैंटीन की योजना उन्हें किसी सौगात से कम नहीं लग रही है.उन्होंने बताया इससे पहले वह बाहर खाना खाते थे तो उन्हें 50 से 60 रुपए एक वक्त के खाने के देने पड़ते थे लेकिन अब यह कैंटीन खुलने से उनकी काफी बचत हो रही है और खाना भी अच्छा मिल रहा है
खाना खाने के लिए लग जाती है लाइन
मजदूरों ने बताया कि महंगाई के दौर में उन्हें दो वक्त का खाना खाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है और वह पैसा जो कमाते हैं वह खाने में ही चला जाता था लेकिन इस कैंटीन के खुलने से उन्हें काफी बचत हो रही है.ऐसी कैंटीन जगह-जगह खुलनी चाहिए और इस तरह की कैंटीन में दो वक्त के खाने की व्यवस्था की जानी चाहिए. आपको बता दें कि कैंटीन में सारा खाना महिलाएं खुद अपने हाथों से तैयार करती हैं जो खाना बिना मसाले के बिल्कुल घर जैसा बनता है.
जिस खाने को खाने के लिए दोपहर 12:00 बजे मज़दूरों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है. बता दें की सरकार की इस योजना में कैंटीन में जो खाना मजदूरों के लिए बनता है यह फिलहाल एक वक्त के लिए बनता है यानी दोपहर 12:00 से 3:00 तक यहां लोग आकर खाना खा सकते हैं.
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