गीता के 3 जीवन बदलने वाले श्लोक,कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ गीता का रहस्य, Karma vs Destiny.
Автор: Sanatan Rahasya Marg
Загружено: 2025-12-30
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गीता के 10 जीवन बदलने वाले श्लोक
Devotional story
The Mystery of Geeta Dark Truth
गीता का सबसे बड़ा सच
कर्म बनाम भाग्य
#कर्म तुम्हारे हाथ में
भाग्य भगवान के हाथ में
“भगवान तुममें हैं | गीता का गहरा संदेश”
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Current Story- 1.श्लोक – ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ (तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म करने में है, फल में नहीं) "कर्म ही पूजा है" — ये वाक्य हर भारतीय के जीवन में गूंजता है, लेकिन इसकी जड़ इस श्लोक में है। भगवान कृष्ण कहते हैं — कर्म करो, लेकिन फल की चिंता मत करो। जब इंसान परिणाम की चिंता छोड़ देता है, तभी उसका काम पूर्ण होता है। क्योंकि फल की चाह में जो भय होता है, वही कर्म को बाँध देता है। यह श्लोक सिखाता है कि सफलता नहीं, कर्तव्य ही जीवन का लक्ष्य है। क्योंकि जब कर्म शुद्ध होता है — तो फल अपने आप पवित्र होता है।
2. श्लोक – ‘योगस्थः कुरु कर्माणि’ (संतुलन में रहकर कर्म करो) कृष्ण कहते हैं — जिसे अपने कर्म में शांति मिल जाए, वही योगी है। हम या तो भूत में जीते हैं, या भविष्य में डरते हैं। लेकिन गीता कहती है — वर्तमान में टिक जाओ, यही जीवन का योग है। जब मन विचलित न हो, तो कर्म ईश्वर का रूप ले लेता है। यही वह अवस्था है जहाँ इंसान अपने ही भीतर भगवान को पा लेता है।
3.श्लोक – ‘न जायते म्रियते वा कदाचित्’ (आत्मा कभी जन्म नहीं लेती, न कभी मरती है) यह वो श्लोक है जिसने ओपेनहाइमर तक को झकझोर दिया था। कृष्ण कहते हैं — आत्मा अमर है। शरीर नाशवान है, पर आत्मा शाश्वत है। यह श्लोक हमें मृत्यु के भय से मुक्त करता है। क्योंकि जो मरता है, वह सिर्फ शरीर है — आत्मा नहीं। यही कारण है कि गीता मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि नए प्रारंभ के रूप में देखती है।
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