शिवजी की बारात चली, गूंजे जयकार | डमरू बाजे बम बम भोले | Shiv Barat Bhajan 2026 | Devotional Bhajan
Автор: Hindi Bhakti Geet Sangrah
Загружено: 2026-02-13
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शिवजी की पावन बारात | हर हर महादेव 🔱
इस दिव्य भजन में भगवान Shiva की अद्भुत बारात का मनोहारी वर्णन है।
नंदी आगे-आगे चल रहे हैं, भूत-प्रेत और गण नाच रहे हैं, साधु-संत "ॐ नमः शिवाय" का जाप कर रहे हैं।
माता Parvati अपने मैके में सजी-धजी प्रभु का इंतजार कर रही हैं।
डमरू की गूंज, शंखनाद और देवताओं की पुष्पवृष्टि से सारा वातावरण शिवमय हो उठता है।
✨ Experience the divine wedding procession of Lord Shiva filled with devotion, celebration, and spiritual energy.
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Lyrics : Debjeet
शिवजी की बारात चली, गूंजे नभ में जयकार,
साथ चले नंदी, भूत-प्रेत, साधु संत अपार।
गौरा मैके में राह निहारे, सजनी का सिंगार,
कब आएंगे प्रभु मेरे, बोले मन बारंबार॥
[ अंतरा 1 ]
डमरू बजे दम-दम, त्रिशूल चमके हाथ,
जटा से बहे गंगाधारा, जगमग करे आकाश।
कैलाश से निकले भोले, लेकर प्रेम अपार,
गौरा मैके में राह निहारे, कब होंगे सिंगार॥
[ मुक्तड़ा दोहराएँ ]
शिवजी की बारात चली, गूंजे नभ में जयकार...
[ अंतरा 2 ]
नंदी आगे-आगे चले, बजते शंख हजार,
भूत-प्रेत संग नाच रहे, जय भोले की पुकार।
देव गणों ने फूल बरसाए, सजा दिया संसार,
गौरा मैके में दीप जलाए, करती इंतजार॥
[ मुक्तड़ा दोहराएँ ]
शिवजी की बारात चली, गूंजे नभ में जयकार...
[ अंतरा 3 ]
साधु-संत भजन गा रहे, "ॐ नमः शिवाय",
नारद वीणा छेड़ रहे, मंगल ध्वनि छाय।
ब्रह्मा-विष्णु हर्षित होकर, देखें शुभ दरबार,
गौरा का मन अधीर हुआ, सुनकर डमरू तार॥
[ मुक्तड़ा दोहराएँ ]
शिवजी की बारात चली, गूंजे नभ में जयकार...
[ अंतरा 4 ]
चंद्र सुशोभित मस्तक पर, सर्प बने श्रृंगार,
रुद्र रूप में दूल्हा सजे, अद्भुत छवि अपार।
माता मैना चिंतित बैठी, देखें बारंबार,
कैसे होंगे शिव शंकर, कैसा होगा व्यवहार॥
[ मुक्तड़ा दोहराएँ ]
शिवजी की बारात चली, गूंजे नभ में जयकार...
[ अंतरा 5 ]
आई बारात द्वार पे जब, गूंजा मंगल गान,
हर्षित हुईं गौरा अति, पाकर अपने प्राण।
भूत-प्रेत भी हर्षित होकर, करने लगे सत्कार,
शिव-गौरा का विवाह हुआ, धन्य हुआ संसार॥
[ मुक्तड़ा दोहराएँ ]
शिवजी की बारात चली, गूंजे नभ में जयकार,
साथ चले नंदी, भूत-प्रेत, साधु संत अपार।
गौरा मैके में राह निहारे, सजनी का सिंगार,
कब आएंगे प्रभु मेरे, बोले मन बारंबार॥
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