संघर्ष की कहानी प्रयागराज का छात्र जीवन, Story of struggle student life of Prayagraj.
Автор: Education platform
Загружено: 2026-02-20
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प्रयागराज (इलाहाबाद) केवल एक शहर नहीं, बल्कि लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए 'सपनों की वर्कशॉप' है। यहाँ की गलियों में संघर्ष की एक अलग ही गूँज सुनाई देती है।
नीचे प्रयागराज के छात्र जीवन के संघर्ष का एक विस्तृत विवरण दिया गया है:
प्रयागराज: संघर्ष और संकल्प की गाथा
1. छोटा बघाड़ा और सलोरी की 'कोठरियां'
प्रयागराज के छात्र जीवन की शुरुआत अक्सर 8x10 के एक छोटे से कमरे से होती है। सलोरी, छोटा बघाड़ा, अल्लापुर और दारागंज जैसे इलाकों की तंग गलियों में हजारों छात्र रहते हैं। इन कमरों में एक ही तख्त पर किताबें भी होती हैं और वहीं सोकर सुनहरे भविष्य के सपने भी देखे जाते हैं।
2. 'दाल-भात' और खुद का अनुशासन
यहाँ का सबसे बड़ा संघर्ष है आत्म-निर्भरता। घर का लाडला बच्चा यहाँ खुद ही रसोइया बन जाता है।
दाल-चोखा-भात: यह यहाँ का 'नेशनल फूड' है क्योंकि यह जल्दी बनता है और सस्ता पड़ता है।
सब्जी मंडी से एक-एक रुपये के लिए मोलभाव करना और महीने के आखिर में पैसों की तंगी के बीच चाय पर गुजारा करना यहाँ की आम बात है।
3. कटरा और यूनिवर्सिटी रोड की तपस्या
सुबह की पहली किरण के साथ ही छात्र लाइब्रेरी या कोचिंग की ओर निकल पड़ते हैं। भारी बस्ते और मन में 'सलेक्शन' का बोझ लिए ये छात्र घंटों खड़े रहकर बस या टेम्पो का इंतजार करते हैं। लू के थपेड़े हों या कड़ाके की ठंड, संगम की रेती पर पढ़ाई का जुनून कभी कम नहीं होता।
4. मानसिक द्वंद्व और घर की उम्मीदें
सबसे कठिन संघर्ष मानसिक होता है।
त्योहारों का त्याग: जब घर पर सब होली-दिवाली मना रहे होते हैं, छात्र कमरे में बैठकर 'लक्ष्मीकांत' या 'स्पेक्ट्रम' पढ़ रहा होता है।
रिश्तेदारों के सवाल: "बेटा, कब तक होगा?" यह सवाल किसी तीर की तरह चुभता है, लेकिन छात्र एक फीकी मुस्कान के साथ फिर से किताबों में डूब जाता है।
5. हार न मानने का जज्बा
प्रयागराज का छात्र गिरता है, असफल होता है, कभी-कभी टूट भी जाता है, लेकिन वह हार नहीं मानता। हनुमान मंदिर (लेटे हुए हनुमान जी) के दर्शन और गंगा किनारे की शांति उसे फिर से लड़ने की शक्ति देती है। यहाँ का संघर्ष उसे केवल एक 'अफसर' नहीं, बल्कि एक मजबूत इंसान बना देता है।
निष्कर्ष: प्रयागराज का संघर्ष केवल एक नौकरी पाने की जद्दोजहद नहीं है, बल्कि यह खुद को तराशने की एक प्रक्रिया है। यहाँ की मिट्टी में वह तपिश है जो एक साधारण युवक को 'प्रशासक' में बदल देती है।
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