Hazrat Khwaja Bakhtiyar Kaki ka waqia|| हज़रत ख़्वाजा बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत KGN||
Автор: حسین اسلامک بیان
Загружено: 2026-01-21
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हज़रत ख़्वाजा बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी (र.अ.) के बहुत ही ख़ास और अज़ीज़ ख़लीफ़ा थे। आप इल्म, तक़वा, फ़क़्र और अल्लाह की मोहब्बत में डूबे रहने वाले बुज़ुर्ग थे।
🔥 “काकी” लक़ब का वाक़िया
एक बार का ज़िक्र है कि हज़रत ख़्वाजा बख़्तियार काकी (र.अ.) के घर में कई दिनों से खाने को कुछ भी नहीं था। फ़ाक़े की नौबत आ गई थी, मगर आपने कभी किसी से कुछ माँगा नहीं।
आपकी बीवी बहुत परेशान थीं, लेकिन अल्लाह पर उनका यक़ीन क़ायम था।
उसी दौरान आपकी बेटी ने रोते हुए कहा:
“अम्मी! मुझे भूख लगी है।”
बीवी ने तसल्ली दी और कहा:
“बेटी! ऊपर ताक़ में जो ‘काकी’ (लकड़ी) रखी है, उसी को पका लो।”
दरअसल वहाँ लकड़ी का एक टुकड़ा रखा था, मगर अल्लाह की क़ुदरत से जब बेटी ने उस “काकी” को उतारकर देखा, तो वह लकड़ी नहीं बल्कि रोटी बन चुकी थी।
जब यह बात हज़रत ख़्वाजा बख़्तियार काकी (र.अ.) को पता चली, तो आपने सज्दा-ए-शुक्र अदा किया और फ़रमाया:
“यह अल्लाह की तरफ़ से रोज़ी है।”
इसी वाक़िये की वजह से आप “काकी” के लक़ब से मशहूर हो गए।
🌸 सबक़ (सीख)
अल्लाह पर पूरा भरोसा रखने वालों को कभी बे-सहारा नहीं छोड़ता
सब्र और फ़क़्र की राह में अल्लाह की मदद ज़रूर आती है
औलिया-ए-अल्लाह दुनिया की तंगी में भी दिल से मालदार होते हैं
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