12 ज्योतिर्लिंगों की पौराणिक कथाएं Part-12 घृष्णेश्वर/घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग
Автор: Bhakti Ras Vrindavan Dham
Загружено: 2026-02-14
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“जहाँ भक्ति अडिग हो, वहाँ स्वयं महादेव प्रकट होते हैं।
ॐ नमः शिवाय।”
घुश्मा की अटल श्रद्धा ने मृत्यु को भी पराजित कर दिया।
यही है घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की अमर महिमा।
ॐ नमः शिवाय… हर हर महादेव!”
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में अंतिम (12वां) और सबसे महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग है, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के वेरुल गाँव (एलोरा गुफाओं के पास) में स्थित है। इसे घुश्मेश्वर या घृष्णेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में रानी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था। यह मंदिर अपने पूर्वमुखी शिवलिंग, शांत वातावरण और अद्वितीय वास्तुकला (24 स्तंभों पर आधारित) के लिए प्रसिद्ध है।
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