श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग 🙏🏻
Автор: Bhakti Vandana
Загружено: 2026-02-15
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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग
इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि यह दिव्य ज्ञान कोई नया उपदेश नहीं है, बल्कि सनातन सत्य है जो सृष्टि के प्रारंभ से चला आ रहा है। जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं—सज्जनों की रक्षा और धर्म की पुनः स्थापना के लिए।
इस अध्याय में आप जानेंगे:
• भगवान के दिव्य जन्म का रहस्य
• अवतार का वास्तविक अर्थ
• कर्म, अकर्म और विकर्म का अंतर
• ज्ञान की अग्नि कैसे कर्मों को भस्म करती है
• संशय को ज्ञान की तलवार से कैसे काटें
• कर्मयोग में स्थित होकर जीवन कैसे जियें
यह केवल कथा नहीं है —
यह जीवन जीने की दिशा है।
यदि आप जीवन में भ्रम, संशय, भय या निर्णय की कठिनाई से गुजर रहे हैं, तो यह अध्याय आपके लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
श्रद्धा से सुनें।
मनन करें।
और अपने जीवन में उतारें।
🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏
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