Daily Bread | ईश्वरीय भेदों का प्रकाश |Feb(फरवरी) 05| परमेश्वर के दास भाई बख्तसिंग के दैनिक सन्देश!
Автор: Yeshu Darshan
Загружено: 2026-02-04
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Daily Bread | ईश्वरीय भेदों का प्रकाश |Feb(फरवरी) 05| परमेश्वर के दास भाई बख्तसिंग के दैनिक सन्देश!
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फरवरी 05/ Feb 05
“उनके पंख एक दूसरे से परस्पर मिले हुए थे; वे अपने अपने सामने सीधे ही चलते हुए मुड़ते नहीं थे।” (यहेजकेल 1:9)
पंख स्वतंत्र गति को सूचित करते हैं। परमेश्वर ने हमको भी आत्मिक पंख दिये हैं जिससे उसके साथ एक होकर परमेश्वर की सहायता से इस पूरी दुनिया में स्वतंत्र होकर उड़ सकें।
जब हम मसीही जीवन की शुरुआत करते हैं तब हम अपने विषय में और हमारे निकट के परिवार जनों के विषय में विचार करते हैं। परन्तु जैसे जैसे आत्मा में वृद्धि पाते हैं वैसे वैसे हम दूसरों के विषय में विचार करते हैं; धीरे धीरे हम पूरे विश्व के विषय में विचार करते हैं। बाद में हममें यह जानने की उत्सुकता जागती है कि इस दुनिया का अंत आने के पश्चात परमेश्वर क्या करनेवाला है। हमारा मन स्वर्ग का तथा आनेवाली नई सृष्टि का विचार करने में लगता है। जैसे जैसे हम आत्मिक वृद्धि पाते हैं, वैसे वैसे यह बढता है, और इसलिये शैतान हमको संसार की, टल जाने वाली वस्तुओं में उलझा के रखने का यत्न करता है। परमेश्वर का उद्देश्य यह है कि हम मानवीय विचारों के बन्धन में न रहें। करूब पंखो के सहारे परमेश्वर का उद्देश्य पूर्ण करने के लिये विश्व में कहीं भी जा सकते थे। और इसी रीति से हमें परमेश्वर के अधीन होना है। इस प्रकार मण्डली द्वारा हर एक स्थल में परमेश्वर का स्वर्गीय उद्देश्य पूरा होगा।
इन चारों जीवधारियों के पंख एक दूसरे के साथ जुड़े हुए थे। इसका अर्थ यह है कि जहाँ एक जीवधारी जाये वहाँ अन्य तीनों को भी उसके पीछे जाना पडे़। यह सच्ची आत्मिक एकता को दर्शाता है। वे स्वतंत्र रीति से अपनी इच्छानुसार खुद की दिशा में नहीं जा सकते थे। मसीह की कलीसिया को इसी रीति से व्यवहार करना है। परमेश्वर की सेवा और उसकी कलीसिया में हम मन मर्जी बातें या व्यवहार नहीं कर सकते। जैसे जैसे हम परमेश्वर की मंडली के विषय में उसका सम्पूर्ण उद्देश्य समझते हैं, वैसे वैसे हमें यह ज्ञात होता है कि हम स्वतंत्र रीति से (अर्थात् मनमानी से) व्यवहार नहीं कर सकते। परन्तु साथी विश्वासियों और सहकर्मियों, जिनके साथ जीवन बिताने और जिम्मेदारी में भाग लेने के लिये बुलाये गये हैं, उनकी पूर्ण संगति में रह कर ही हमें सबकुछ करना है। परमेश्वर हमसे आत्मिक एकता चाहता है।
जैसे जैसे आप आत्मा में बढ़ते जाएँ, वैसे वैसे परमेश्वर के सहकर्मी के रुप में आपके और सहविश्वासियों के बीच में आत्मिक एकता दिखनी चाहिये। जब सहविश्वासियों के साथ घुल-मिल कर रहने तथा कार्य करने में कठ़िन लगे तो इसका अर्थ यह है कि अभी भी आप सांसारिक एवं मसीह में बच्चे ही हैं। परन्तु जैसे जैसे आत्मिक वृद्धि होती है, वैसे वैसे एकता, मेल, स्वतंत्रता, शान्ति आती है। और याद रखें कि यह आत्मिक एकता है, सांसारिक एकता नहीं। जिन्होंने परमेश्वर को नहीं देखा, और जो परमेश्वर का उद्देश्य एवं ईरादा जानते नहीं, वे आपके साथ एक हो नहीं सकते। जो परमेश्वर को पहचानते हैं और जिनके अन्दर परमेश्वर का आत्मा वास करता है वे आपके साथ कार्य कर सकते हैं। चारों जीवधारियों का सीधा जाना अनन्त जीवन को दर्शाता है। वे पीछे हट नहीं सकते परन्तु केवल आगे ही बढ़ते थे। जैसे जैसे हम परमेश्वर के साथ आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे व्यवस्थित रूप से हम वृद्धि पाते हैं।
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