अज तसनीफ साध अनुपदास लीखी- कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) तमांम पढ़कर बंन्दोबस्त करो छावणी ऐरनपुरा
Автор: Jagathitkarni (274)
Загружено: 2026-02-02
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जय परमेश्वर
सोक्यातो हिंन्दु-और क्यामुसलमांन.और.क्याअंग्रेज.और.क्या सातों आठों वलायतोंके.लोग.इस,कीताबको;अपने, जीवके मुवाफीक रखना!और.कीताबको!पढकर वाकीफहोना ओर,पुरांनी होनेपर-नइ,कीताब-छपवाकर इसका नमुना पास रखना-और,कीताबें-छपवाके बहुतसी जारीकरादेना ताकि,संसार,भुलेनही,ताकि,सब संसारकेलोग हेतकरके इनबनीयोंके.जालको.रावण वगैराकी तरहसे छोडावें सोमेरे.जीतेजी.सब-संसार केलोग ऐक-दीलहोकर इन-बनीयों,बेइमांनोंके-राक्षसीपापको रावणकी तरहसे; छोडाओगे-तो-छुटजावेगा नहीतो फीर तुमसे नहीछुटेगा-क्युंकितुम-लोगोंनेदेखा नहीहै.इससेतुमको इनके जालकी,मालुमनहीहै.और,यह बेइमांन ऐसेहें.किअपने पापके,प्रगट.नहोनेकेलीये,सब संसारके लोगोंको भुलावेंगे.....( २२७ )
अज तसनीफ साध अनुपदास लीखी-
कीताब - [ जगतहीतकारनी ] ( २७४ ) तमांम पढ़कर बंन्दोबस्त करो
छावणी ऐरनपुरामें, शिवगंज - ३०७०२७ ( मारवाङ )
ता १७ अप्रेल संन १९०९ झा बैसाष बुदी १२ सं॥ १९६५
M. No. :- 8905653801
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