जय गणेश आरती | Jai Ganesh Jai Ganesh Deva | Ganesh Ji Aarti
Автор: SoulLens
Загружено: 2026-01-29
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🌸 श्री गणेश चालीसा
जय गणपति सद्गुण सदन, कविवर बदन कृपाल
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल
जय जय जय गणपति गणराजू
मंगल भरण करण शुभ काजू
जै गजवदन सदन सुखदाता
विश्व विनायक बुद्धि विधाता
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन
राजत मणि मुक्तन उर माला
स्वर्ण मुकुट सिर नयन विशाला
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं
मोदक भोग सुगन्धित फूलं
सुन्दर पीताम्बर तन साजित
चरण पादुका मुनि मन राजित
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता
गौरी ललन विश्व विख्याता
ऋद्धि सिद्धि तव चंवर डुलावे
मूषक वाहन सोहत द्वारे
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी
अति शुचि पावन मंगलकारी
एक समय गिरिराज कुमारी
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा
तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा
अतिथि जानि कै गौरी सुखारी
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी
अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा
मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला
बिना गर्भ धारण यहि काला
गणनायक गुण ज्ञान निधाना
पूजित प्रथम रूप भगवाना
अस कहि अन्तर्ध्यान रूप ह्वै
पालना पर बालक स्वरूप ह्वै
बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना
सकल मगन सुख मंगल गावहिं
नाभ ते सुर सुमन बरसावहिं
शम्भु उमा बहु दान लुटावहिं
सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं
लखि अति आनन्द मंगल साजा
देखन भी आए शनि राजा
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं
बालक देखन चाहत नाहीं
गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो
उत्सव मोर न शनि तू जायो
कहं लगे शनि मन सकुचाई
का करीं शिशु मोहि दिखाई
नहिं विश्वास उमा कर भयऊ
शनि सों बालक देखन कह्यऊ
पड़तहि शनि दृग कोण प्रकाशा
बालक सिर उरि गयो अकाशा
गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी
सो दुख दशा गयो नहिं वरणी
हाहाकार मच्यो कैलाशा
शनि कीन्हों लखि सुत का नाशा
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए
काटि चक्र सो गज सिर लाए
बालक के धड़ ऊपर धारयो
प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा
पृथ्वी कर प्रदक्षिण लीन्हा
चले षडानन भरमि भुलाई
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें
धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई
शेष सहस मुख सकै न गाई
मैं मति हीन मलीन दुखारी
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी
भजत रामसुन्दर प्रभु दासा
लख प्रयाग ककरा दुर्वासा
अब प्रभु दया दीजै जन पर
रखहु नाथ मोहि अपने कर
दोहा:
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करें धर ध्यान
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सम्मान🔱 Ganesh Ji Aarti
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