देवता भी वंचित, पर असुर बना महान भक्त – वृत्तासुर का पूर्व जन्म
Автор: LUACHARYA
Загружено: 2026-03-02
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श्रीमद् भागवत महापुराण की इस अद्भुत कथा में वृत्तासुर का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है। बाहरी रूप से असुर और देवताओं का शत्रु होने के बावजूद, वृत्तासुर के हृदय में भगवान के प्रति अटूट प्रेम और पूर्ण समर्पण था।
पूर्व जन्म में वे राजा चित्रकेतु थे, जिन्हें माता पार्वती के शाप से असुर योनि प्राप्त हुई, परंतु उनकी भक्ति कभी कम नहीं हुई।
यह कथा बताती है कि भगवान बाहरी रूप नहीं, बल्कि हृदय की भक्ति देखते हैं। जहां कई देवता भी पूर्ण शरणागति नहीं कर पाते, वहां वृत्तासुर जैसे असुर भगवान के परम प्रिय बन जाते हैं।
इस कथा से हमें सच्ची भक्ति, शरणागति और भगवान की करुणा का गहरा संदेश मिलता है।
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