माघ गुप्त नवरात्रिचा सहावा दिवस महाविद्या मां त्रिपुर भैरवी पूजा विधि प्रिय भोग रंग फूल मंत्र आरती
Автор: Shobhraj Divya Darshan
Загружено: 2026-01-23
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माघ गुप्त नवरात्रि के छठवें दिन महाविद्या मां त्रिपुर भैरवी की कथा | Gupt Navratri ki Katha Day 6 #maatripurbhairavikikatha #maadurgakikatha
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Navratri Katha- गुप्त नवरात्रि की कथा, गुप्त नवरात्रि के छठवें दिन - मां त्रिपुर भैरवी की कथा | Gupt Navratri ki Katha | Mahavidya maa tripur Bhairavi ki Katha,
नमस्कार दोस्तों आज 24 जनवरी 2026 माघ गुप्त नवरात्रि के छठवें दिन में आप सभी के समझ मां त्रिपुर भैरवी देवी की कथा प्रस्तुत कर रही हूं।
त्रिपुर भैरवी के नाना प्रकार के भेद बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं त्रिपुरा भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, कामेश्वरी भैरवी, नित्याभैरवी, रुद्रभैरवी, भद्र भैरवी तथा षटकुटा भैरवी आदि। त्रिपुरा भैरवी ऊर्ध्वान्वय की देवता हैं।
माता की चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। । यह साधक को युक्ति और मुक्ति दोनों ही प्रदान करती है। इसकी साधना से षोडश कला निपुण सन्तान की प्राप्ति होती है। जल, थल और नभ में उसका वर्चस्व कायम होता है। आजीविका और व्यापार में इतनी वृद्धि होती है कि व्यक्ति संसार भर में धन श्रेष्ठ यानि सर्वाधिक धनी बनकर सुख भोग करता है।
जीवन में काम, सौभाग्य और शारीरिक सुख के साथ आरोग्य सिद्धि के लिए इस देवी की आराधना की जाती है। इसकी साधना से धन सम्पदा की प्राप्ति होती है, मनोवांछित वर या कन्या से विवाह होता है
दुर्गा सप्तशती के अनुसार त्रिपुरभैरवी के उग्र स्वरूप की कांति हजारों उगते हुए सूर्य के समान हैं। दिगंबरा देवी श्यामल वर्ण की हैं व तीन खुले हुए नेत्रों से युक्त है व मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करती हैं व रुद्राक्ष, सर्पों व नरमुंड माला धरण किए हैं। इनके लम्बे काले घनघोर बाल हैं, चार भुजाओं से युक्त देवी अपने दायें हाथों में खड़ग व नरमुंड से निर्मित खप्पर धारण करती हैं तथा बायें हाथों से अभय तथा वर मुद्रा प्रदर्शित करती हैं। सौम्य रूप में त्रिपुरभैरवी लाल वस्त्र व गले में मुंड-माला धारण किए हैं। समस्त देह पर रक्त चंदन का लेपन हैं
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