संसद के खेल से किसको क्या मिला?सेना ने मिटाये गुलामी के प्रतीक?नसीरूद्दीन को देश बदलने का अहसास हुआ?
Автор: Dhirendra Pundir News Point
Загружено: 2026-02-06
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वीरेन्द्र भट्ट- संसद में चल रही फिल्म का चुनावों से गहरा मतलब है और इस बार भी बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी अपनी रणनीति उसी हिसाब से बनाई थी, बीजेपी की ओर से पीएम मोदी ने कमान संभाली थी तो राहुल का लक्ष्य भी पीएम मोदी से ज्यादा अपने सहयोगियों को मतदाताओं के बीच निबटाने की थी, राहुल की सबसे पहली चुनौती लोकसभा चुनाव है और राज्यों की हार से उसकी बारगैनिंम क्षमता कम होती जा रही है लिहाजा राहुल के रणनीतिकार संसद का इस्तेमाल अपने सहयोगियों पर दबाव दालने के लिये कर रहे थे कि वो बता सके मोदी विरोधी राजनीति का केन्द्र राहुल है क्षेत्रीय पार्टियां नहीं ,
सेना ने गुलामी के समय से चल रहे आ रहे २४६ नामों को बदल दिया है- अक्सर हर शहर में आपको Mall road या अंग्रेजी रेजीमेंट के नाम मिल जाते है और आजादी के बाद भी इन को हटाने की किसी को सूझ नहीं रही थी लेकिन अब सेना ने इन नामों को मिटा दिया है और भारतीय बलिदानियों और प्रतीकों से इन जगहों का नाम बदल दिया है। ये औपनिवेशिकता से बदलाव का ही कदम है।
नसीरूद्दीन अपने जिहादी विचार कभी छिपा कर नहीं रखते है , देश के इतने प्यार देने क बावजूद उनको लगता है कि जैसे इस देश ने गंगा जमुनी नाम की संस्कृति की प्यार की विचार धारा को तिलांजलि दे दी है। अब फिर उनके साथ ऐसा हो गया कि उन्हें लगता है कि ये देश वैसा नहीं रह गया है जिसमें वो पैदा हुये थे।
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