कृष्ण की चोरी पकड़े जाने के बाद रूकमिणी,राधा,यशोदा,कृष्ण के बीच बतकही (सोहर) || चंदन तिवारी
Автор: Chandan Tiwari {Purabiyataan}
Загружено: 2024-05-18
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घर में से निकलेली रूकमिणी, आंगन खाड़ भइली हो
(रूकमिणी,राधा,यशोदा,कृष्ण संवाद)
गीत स्रोत: कृष्णदेव उपाध्याय का संकलन
गायन: चंदन तिवारी
रिकार्डिंग: उपेंद्र पाठक
प्रस्तुति: लोकराग
सर्वाधिकार सुरक्षित
रूकमिणी,यशोदा,राधा,कृष्ण संवाद प्रसंग
प्रसंग यह है कि एक दिन रूकमिणी की तिलरी चोरी हो जाती है. वह उदास हैं. यशोदा पूछती हैं कि क्या हुआ? रूकमिणी बताती हैं. यशोदा कहती हैं कि फिर तुम भी जाओ और जिसने तुम्हारी तिलरी चुराई है, उसकी बांसुरी चुरा लो. रूकमिणी ऐसा ही करती हैं. वह कृष्ण का बांसुरी चुरा लेती हैं. कृष्ण घर लौटते हैं. चेहरा उतरा हुआ, मुंह लटका हुआ. यशोदा अपने लाल को चिढ़ाते हुए पूछती हैं, क्या हुआ लल्ला. कृष्ण कहते हैं, अब क्या ही बतायें अम्मा. हम दूसरों की चोरी करते हैं, आज मेरी ही बांसुरी को कोई चुरा ले गया. यशोदा कहती हैं कि तुम जिसकी तिलरी चुराये हो, वह लौटा दो तो बांसुरी भी मिल जाएगी. कृष्ण को पता चल जाता है कि यह सास बहू के मेल से हुआ खेल है. कृष्ण वहां से उठते हैं. सीधे अपने मौसी के यहां जाते हैं. अपनी मौसी से कहते हैं कि तुम यहां अपने घर में मगन रहती हो और वहां मेरे घर में मेरी मां और रूकमिणी तुम्हे कोसती रहती हैं. मौसी भागी भागी अपनी बहन यशोदा के यहां पहुंचती हैं. पूछती हैं यशोदा से कि हम क्या बिगाड़े हैं कि तुम सास बहू मेरी शिकायत बतियाते रहती हो. यशोदा कहती हैं कि किसके फेरे में पड़ गयी. बड़ा हो गया है, फिर भी चोरी की आदत जा नहीं रही. इसकी चोरी पकड़ी गयी है, इसलिए यह अब इधर से उधर बातें बनाते फिर रहा है.मौसी कृष्ण को चार बात सुना देती हैं. कृष्ण वहां से निकल अपने ससुराल यानी रूकमिणी के गांव पहुंचते हैं. अपनी सरहज से कहते हैं कि आप यहां अपनी दुनिया में मगन है और आपकी ननद रूकमिणी हमारे यहां आपकी ही शिकायत बतियाते रहती है. सरहज भी आती हैं. यहां आकर पता चलता है कि कृष्ण चोरी की बात को छुपाने के लिए यह सब कर रहे हैं. सरहज भी कृष्ण को बात सुनाकर जाती हैं. कहती हैं कि शरीर से ही नहीं मन से भी काले हो आप तो. लड़ाई लगवाते चल रहे हो. अब कृष्ण अंत में राधा के यहां पहुंचते हैं. वहां पहुंचकर राधा को तैयार करते हैं. कहते हैं कि तुम चलो हमारे यहां. रूकमिणी को पता नहीं तुमसे ज्यादा समस्या है कि दिन रात तुम्हारी ही बुराई बतियाती है. राधा तैयार होकर पहुंचती हैं. पूछती हैं रूकमिणी से कि हमने आपका क्या बिगाड़ा है जो आप मेरी शिकायत करते रहती हैं. रूकमिणी और यशोदा सारा हाल बताते हैं. राधा कहती हैं कि इतने बड़े हो गये हो, फिर भी चोरी की आदत जा नहीं रही. बचपन में दूसरों के यहां माखन, दही चुराते थे और अब घर पर ही चोरी करने लगे हो. आपस में सबके बीच लड़ाई लगवाते हो. आओ तो तुम्हें बताती हूं.
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