Ekadashi vrat paran katha || तुलसी माता की कथा || आमलकी एकादशी व्रत पारण कथा
Автор: Hindi Katha Kahani
Загружено: 2026-02-27
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आमलकी एकादशी का व्रत पारण 28 फरवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 48 मिनट से लेकर 9 बजकर 5 मिनट तक की अवधि में किया जाएगा।
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एकादशी व्रत पारणा किस चीज से करनी चाहिए
एकादशी पारण के दिन चावल खाना चाहिए या नहीं
एकादशी व्रत का पारण कैसे किया जाता है देवशयनी एकादशी एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों को दशमी तिथि से ही एकादशी के व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और अगले दिन एकादशी तिथि को सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करना चाहिए घर और खासकर पूजा घर को अच्छी तरह से साफ करें इसके बाद भगवान विष्णु जी भगवान कृष्ण और लड्डू गोपाल जी की मूर्ति स्थापित करें और उनका अभिषेक करें भगवान को पीले वस्त्रों से सजाएं और पीले चंदन का तिलक भी लगाएं मूर्ति के सामने देसी घी का दीपक जलाएं इसके बाद एकादशी व्रत को पूरी श्रद्धा से करने का निर्णय ले ओम नमो भगवते वासुदेव मंत्र का 108 बार जाप करें इस दिन विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ भी करें और भगवान को पंचामृत और तुलसी दल अवश्य ही अर्पित करें पूजा का समापन आरती के साथ करें और शाम के समय भी भगवान विष्णु जी की विधि विधान से पूजा करें अगले दिन द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें और गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन करा के दान दक्षिणा अवश्य दें
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