अति विशेष चिंतन काठमांडू नेपाल में शिविर के अंतिम क्षण शिष्य को निर्दिष्ट करते हुए हैं
Автор: Vivek Pathak BMKS
Загружено: 2025-05-21
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श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ही परमधाम सिद्धाश्रम के संस्थापक संचालक ऋषियों के सम्राट ब्रह्मर्षि स्वामी सच्चिदानन्द जी महाराज के अंशावतार हैं।
इनका जन्म ही कलयुग की भयावहता के बीच सतयुग की स्थापना करने के लिये हुआ है और समाज को नशामुक्त, मांसाहारमुक्त व चरित्रवान् बनाते हुए माँ की साधना-आराधना की तरफ बढ़ाना है। आज तक इन्होंने कई लाख परिवारों को पूर्णतः नशामुक्त और मांसाहारमुक्त किया है। इसके प्रमाण देश व विदेश में फैले हुए लाखों शिष्य हैं।
इन्होंने 23 जनवरी सन् 1997 में भारतवर्ष के मध्यप्रदेश प्रान्त के शहडोल जिले की ब्यौहारी तहसील में पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम की स्थापना की है। वहां पर 15 अप्रैल 1997 से श्रीदुर्गाचालीसा का अखण्ड पाठ प्रारम्भ कराया है, जो अहर्निश चौबीसों घण्टे अनन्त काल के लिये चल रहा है। इसकी ऊर्जा से सिद्धाश्रम धाम का वातावरण पूर्णतया चैतन्य है। यहां पर आने वाले भक्तों के लिये भोजन एवं रुकने की व्यवस्था निःशुल्क रहती है। गुरुवरश्री से मिलने एवं किसी भी समस्या के समाधान के लिये किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है। आज हम और आप ऐसे अवतारी युग चेतना पुरुष को पहचानें और इनके द्वारा बताये हुए मार्ग पर चलकर अपना जीवन धन्य बनाएँ देखने वाली कैसे सोता है ।
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